
Patrika Opinion: महिला क्रिकेट से छंटने लगे उपेक्षा के बादल
भारत में महिला क्रिकेट प्रीमियर लीग की घोषणा और इसके लिए टीमों की नीलामी को मिला जबरदस्त प्रतिसाद अगर कुछ कहते हैं तो यह कि हम निकट भविष्य में न सिर्फ अपने देश बल्कि पूरे जहान में महिला क्रिकेट की नई तस्वीर देखेंगे। ऐसी तस्वीर जिसमें खेल का स्तर बहुत ऊंचा होगा, प्रतिस्पद्र्धा कड़ी और रोमांच भरपूर होगा। नित नई प्रतिभाएं सामने आएंगी। न सिर्फ सामने आएंगी, बल्कि वह मुकाम व मंच भी पाएंगी जिसकी कि वे हकदार हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह आज पुरुष क्रिकेट का परिदृश्य है। वर्ष 2008 से पहले के पुरुष क्रिकेट को याद कर लें। किसी के सपनेे में भी नहीं आता था कि 20 ओवर में ढाई सौ-पौने तीन सौ रन भी बन सकते हैं।
पुरुष वर्ग में उस साल आइपीएल के प्रादुर्भाव का परिणाम है कि आज यह सिर्फ संभव ही नहीं, सहज भी महसूस होता है। भारत पर इसका असर किस तरह और कितना पक्का हुआ है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आइपीएल की शुरुआत के बाद से अब तक देश न सिर्फ टी-20, बल्कि एक दिवसीय और टेस्ट अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी स्वरूपों में सबसे मजबूत देशों में शुमार होता है। एक टीम ग्यारह-बारह मजबूत खिलाडिय़ों के लिए तरसती है, लेकिन हमारे पास बेंच पर बैठने के लिए ही बीस-तीस खिलाड़ी अतिरिक्त हैं। यही तस्वीर आने वाले समय में महिला क्रिकेट में देखने को मिलेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। बैडमिंटन, टेनिस, कुश्ती जैसे व्यक्तिगत खेलों में भारत की लड़कियां अच्छा कर रही हैं, लेकिन क्रिकेट जैसे टीम खेल को आगे बढ़ाने के लिए कुछ विशेष प्रयास की जरूरत थी। महिला क्रिकेट में देश के मौजूदा परिदृश्य में अच्छा रंग भरने के लिए इस लीग से ज्यादा अच्छा कुछ नहीं हो सकता था। ऑस्ट्रेलिया में 2015 से महिलाओं की बिग बैश लीग चल रही है, लेकिन भारतीय महिला इंडियन प्रीमियर लीग के इससे आगे निकलने की गुंजाइश इसलिए भरपूर है कि इस लीग के साथ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड जुड़ा है, जो दुनिया का सबसे समृद्ध व शक्तिशाली बोर्ड है।
बोर्ड की मौजूदगी का ही परिणाम है कि विभिन्न फ्रेंचाइजी ने अनुमानित चार हजार करोड़ रुपए से ज्यादा 4,669 करोड़ रुपए महिला आइपीएल की पांच टीमों की खरीद पर न्योछावर कर दिए। आने वाले दिनों में ऐसे ही भरपूर पैसों की बारिश महिला खिलाडिय़ों पर भी होगी। तब धन व कॅरियर के अभाव के कारण क्रिकेट से दूर रहने वाली लड़कियां बड़ी संख्या में इस खेल में आएंगी। इससे एक तंत्र विकसित हो जाएगा, जिसमें देश को भरपूर प्रतिभाएं मिलती रहेंगी और सैकड़ों की संख्या में घरेलू खिलाडिय़ों का भी कॅरियर निरंतर बनता रहेगा।
Published on:
26 Jan 2023 09:40 pm
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