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पाक पर ट्रंप का बयान: कितना दम?

ट्रंप का हालिया बयान और अमरीका का पाकिस्तान को सैन्य सहायता पर पाबंदी की बात एक दबाव बनाने की कोशिश का हिस्सा ही है।

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Sunil Sharma

Jan 03, 2018

donald trump

donald trump

- दीपक के. सिंह, द.एशिया मामलों के विशेषज्ञ

अमरीका ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल के पहले ही ट्वीट में कहा कि अमरीका ने पंद्रह वर्षों के दौरान मूर्खतापूर्ण तरीके से पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर की सहायता की है लेकिन इसके बदले में पाकिस्तान से झूठ और छल ही मिला है। इसके अलावा अमरीका की ओर से पाकिस्तान को दी जाने वाले 25.5 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता पर भी रोक लगा दी गई है। सवाल यही है कि क्या अमरीका अब पाकिस्तान के साथ दोस्ती निभाते हुए उकता गया है या फिर वह पाकिस्तान की चीन के साथ बढ़ती नजदीकी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है?

इन प्रश्नों के उत्तर जानने से पहले हमें यह समझना चाहिए कि अमरीकी राष्ट्रपति का व्यक्त्वि ऐसा है कि उन्हें उनके ही देश में बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता। उन्होंने ट्रांस पैसेफिक एग्रीमेंट से तो कभी विश्व व्यापार संगठन से भी निकलने की बात की। वे अमरीका के ‘अनडन प्रेसीडेंट’ हैं जो अपने पूर्ववर्तियों के कार्यों को बदलने का काम करने में लगे हैं। अमरीका ऐसा शख्तिशाली देश है जिसकी नीतियों में एकरूपता होनी चाहिए लेकिन इन दिनों ऐसा देखने में नहीं आ रहा है। यह तो अच्छा है कि वहां की लोकतांत्रिक संस्थाओं द्वारा बहुत सी बातों को नियंत्रित किया जाता है।

ट्रंप की तीखी बयानबाजी और हालिया फैसलों के बाद पाकिस्तान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि अमरीका ने पाकिस्तान के लिए जो कुछ भी किया है, उसे अनुदान का नाम नहीं दिया जाना चाहिए। अमरीका पाकिस्तान को आतंक के विरुद्ध लड़ाई के नाम पर जो राशि देता है, वास्तव में वह तो सहयोगात्मक राशि की तरह है। यह तो पाकिस्तान का अधिकार है जो उसे मिलना ही चाहिए।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अमरीका, अफगानिस्तान में लड़ाई के लिए पाकिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल करता रहा है और वह इसी की कीमत चुकाता आया है। उन्होंने यहां तक कहा कि अमरीका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली सहायता राशि के संदर्भ में ‘नो मोर’ यानी अब और नहीं का कोई महत्व नहीं है। अमरीका की तानाशाही और बकवास को पाकिस्तान अब बर्दाश्त नहीं करेगा। दरअसल, चीन पाकिस्तान का सदाबहार दोस्त बन चुका है। चीन दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्र के तौर पर उभर रहा है। अमरीका कुल मिलाकर अपनी असफलताओं का ठीकरा पाकिस्तान के सिर फोडऩा चाहता है।

ट्रंप का हालिया बयान और अमरीका का पाकिस्तान को सैन्य सहायता पर पाबंदी की बात एक दबाव बनाने की कोशिश का हिस्सा ही है। हकीकत यही है कि अमरीका के लिए पाकिस्तान परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण देश रहा है और आगे भी रहेगा। दीर्घकाल में इन सारी बातों का कोई असर नहीं होने वाला है। जहां तक पाकिस्तान की बयानबाजी की बात तो उसकी प्रतिक्रिया तो इसलिए ऐसी आ रही है क्योंकि आम जनता अमरीकी राष्ट्रपति की बयानबाजी के संदर्भ में पाकिस्तान की सरकार के विरुद्ध बोलने लगी है।

पाकिस्तान में सामाजिक स्तर पर कहा जाने लगा है कि अमरीका, पाकिस्तान में आकर कुछ भी कर जाता है और कुछ भी बयान दिए जा रहा है, पाकिस्तान सरकार इस मामले में कुछ ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। इस विरोध को नियंत्रित करने की दिशा में पाकिस्तान सरकार को भी अमरीका के विरोध में बयानबाजी करनी पड़ रही है। जहां तक यह बात है कि अमरीका की पाकिस्तान के विरुद्ध बयानबाजी में भारत को क्या लाभ मिल सकता है तो मेरा मानना है कि इन सारी परिस्थितियों से भारत के कूटनीतिकों को बहुत खुश होने की जरूरत नहीं है।

यदि अमरीका, चीन और रूस को अपना दुश्मन और भारत को स्वाभाविक मित्र बताता है तो इसमें अधिक प्रसन्न होने वाली कोई बात नहीं है। भारत को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। अमरीका चाहता है कि वह दक्षिण एशिया में चीन को नियंत्रित करे और इसके लिए वह भारत को अपना मित्र बताकर, उसे आगे बढ़ाने की कोशिश में है। लेकिन, भारत को चाहिए कि वह किसी भी झांसे में नहीं आए। भारत को चाहिए कि वह पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सुदृढ़ करने पर ध्यान दे।

भारत को दक्षिण एशिया का स्वाभाविक नेतृत्व करने वाले देश के तौर पर उभरना चाहिए न कि किसी अन्य देश के सहारे क्षेत्र में दादागीरी करने वाले देश की तरह आगे बढऩा चाहिए। हमें समझना चाहिए कि नेपाल में जो नई सरकार आई है, वह चीन की ओर झुकाव रखती है। चीन ने श्रीलंका के साथ अच्छे संबंध बनाए हैं। मालदीव मे भारी-भरकम निवेश किया है। भारत को यह काम आगे बढक़र पहले ही करना चाहिए था। पड़ोसी और कम से कम छोटे देशों के साथ बराबरी के व्यवहार को छोड़ बड़ी उदारता के साथ काम करना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर भारत नेपाल को ***** जाम की धमकी की बात करता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। भारत को यदि दीर्घकाल में बड़ी ताकत बनना है तो अमरीका पर अतिरिक्त भरोसा करना छोडऩा होगा। वह हमसे हजारों किलोमीटर की दूरी पर है। हमें पड़ोसियों के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने पर ध्यान देना होगा। पाकिस्तान को अमरीकी धमकियों से हमें खुश होने की जरूरत नहीं है।