एक समय तेज गाड़ी के नाम पर एक राजधानी एक्सप्रेस ही हुआ करती थी, जबकि अब कई राजधानी एक्सप्रेस हैं। कई स्थानों से शताब्दी रेलगाडिय़ां भी संचालित होती हैं। इन सुविधाओं की श्रंखला में नवीनतम कड़ी अत्याधुनिक साधन-सुविधाओं से सुसज्जित और सर्वाधिक तेज गति वाली वंदे भारत रेल है, जिसका पूरे देश में जाल फैला हुआ है।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले सालों में हमारे देश ने रेल सुविधाओं को लेकर उल्लेखनीय प्रगति की है। एक समय तेज गाड़ी के नाम पर एक राजधानी एक्सप्रेस ही हुआ करती थी, जबकि अब कई राजधानी एक्सप्रेस हैं। कई स्थानों से शताब्दी रेलगाडिय़ां भी संचालित होती हैं। इन सुविधाओं की श्रंखला में नवीनतम कड़ी अत्याधुनिक साधन-सुविधाओं से सुसज्जित और सर्वाधिक तेज गति वाली वंदे भारत रेल है, जिसका पूरे देश में जाल फैला हुआ है। रेलवे इन सुविधाओं के लिए निश्चित ही बधाई का पात्र है। इन सबके बीच रेलवे को यात्रियों को दी जाने वाली मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कुछ पहलुओं पर भी विचार करना होगा। खान-पान से जुड़ीं सुविधाओं को लेकर र्तो तअधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
हाल ही में पटना की वंदे भारत रेलगाड़ी में सफर कर रहे एक यात्री के खाने में कीड़ा निकलने की जानकारी सामने आई है। वंदे भारत के साथ दूसरी ट्रेनों में एक्सपायरी तारीख की खाद्य सामग्री, बासी समोसे और अन्य गुणवत्ताहीन खान-पान के उदाहरण इससे पहले भी सामने आ चुके हैं। भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क की अपनी साख है। इस तरह की घटनाएं इस साख पर विपरीत असर डालती हैं। रेलवे को समझना होगा कि ऐसे उदाहरण से उसको होने वाले नुकसान की भरपाई आसान नहीं है क्योंकि बड़ी संख्या में यात्री रेलवे सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। रेलवे की अति उत्तम वंदे भारत सेवा की ख्याति दुनिया भर में है। देश-दुनिया के यात्री इसमें सफर करते हैं। समझा जा सकता है कि अगर विदेशी पर्यटकों को परोसे जाने वाली खाद्य सामग्री में कुछ खराब निकल गया तो वे क्या संदेश लेकर जाएंगे। दूषित, बासी और कीड़े-मकोड़ों से युक्त खाद्य सामग्री सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकती है, इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है। एक उपभोक्ता के रूप में रेलवे को भुगतान कर प्रत्येक यात्री सुरक्षित व सुविधाजनक सफर की अपेक्षा रखता है। पैसा लेने के बाद उसके अनुरूप सुविधा उपलब्ध करवाना उसकी जिम्मेदारी भी है। वंदे भारत के संदर्भ में रेलवे से इस जिम्मेदारी के निर्वहन में कहीं न कहीं चूक हो रही है। रेलवे को इस चूक की पड़ताल कर समाधान का रास्ता निकालना होगा। खान-पान के लिए नियुक्त एजेंसियों को ताकीद करना होगा कि यात्रियों के खान-पान से जुड़ीं ऐसी शिकायतों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही समूची व्यवस्था की समीक्षा भी करनी होगी कि कहां किस तरह की कमी रहने से रेलवे की छवि पर विपरीत असर डालने वाली ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
भविष्य में खान-पान व अन्य सुविधाओं की सतत निगरानी के लिए पारदर्शी तंत्र बनाना होगा। यात्रियों की शिकायतों के त्वरित समाधान का बंदोबस्त भी करना होगा। यात्रियों को गन्तव्य तक सुरक्षित पहुंचाने के साथ उन्हें शुद्ध खान-पान उपलब्ध कराना उसकी पहली जिम्मेदारी है। गड़बडिय़ां सामने आते ही जिम्मेदारों को कसने का काम होगा तो इस तरह की शिकायतें स्वत: ही कम होने के साथ धीरे-धीरे खत्म भी हो जाएंगी, यह उम्मीद की जानी चाहिए।