पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
संगठनात्मक ढांचा मजबूत होगा कांग्रेस का
लोकतांत्रिक देश में चुनाव का महत्व मानव शरीर में हृदय से कम नहीं है। राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक प्रणाली से देश में लोकतंत्र मजबूत होता है। कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद के लिए हो रहे चुनाव से पार्टी के भीतर संगठनात्मक ढांचा मजबूत बनेगा। पार्टी बेहतर ढंग से आमजन की समस्याओं की ओर सरकार का ध्यानाकर्षण कर सकेगी।
-पी.सी. खंडेलवाल, जयपुर
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मात्र ढकोसला
कांग्रेस चुनाव समिति की हिदायत के बावजूद बड़े नेताओं के द्वारा अध्यक्ष पद के लिए खरगे के समर्थन में मतदान की अपील से कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव एक औपचारिकता बनकर रह गया है। साथ ही नए। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लिए गए निर्णय गांधी परिवार के हस्तक्षेप से इतर होंगे, इस बात की गारंटी कौन देगा। कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अध्यक्ष के चुनाव की यह प्रक्रिया ढकोसला मात्र है। घर के देव और घर के ही पुजारी।
-भवानी सिंह, देशनोक, बीकानेर
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पार्टी को बचाने की कोशिश
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। नि:संदेह गांधी परिवार से बाहर का चयनित अध्यक्ष पार्टी को बिखरने से बचाने की कोशिश करेगा। इससे जनता के बीच संदेश जाएगा कि पार्टी किसी परिवार की बपौती नहीं है। नए अध्यक्ष को गाँधी परिवार के आभा मण्डल से बाहर निकल कर काम करना होगा। अगर अध्यक्ष ने विगत दशकों में हुई क्षति की भरपाई कर ली, तो भाजपा के लिए कांग्रेस चुनौती बन सकती है।
-बिपिन चन्द्र जोशी, बेंगलूरू
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खास परिवर्तन की आशा नहीं
कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के दो बड़े नेता मैदान में उतरे हैं। चुनाव प्रक्रिया में जिस तरह का माहौल नजर आता है, उसे देखते हुए नहीं लगता कि इस कवायद से पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र में कोई बड़ा परिवर्तन होगा।
- गजानन पाण्डेय , हैदराबाद
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परिवारवाद से मुक्ति
अध्यक्ष चुनाव में गैर गांधी परिवार के उम्मीदवार होने से कांग्रेस पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अब कांग्रेस परिवारवाद के एकछत्र शासन से मुक्ति की ओर बढ़ रही हैं। हालांकि अब भी गांधी परिवार का वर्चस्व किसी से छुपा हुआ नहीं हैं। इस चुनाव के बाद कांग्रेस को वह अनुभवी सेनानायक मिल सकता हैं, जो विलुप्त होती कांग्रेस को को मजबूती दे सके।
-मनु प्रताप सिंह,चींचडौली,खेतड़ी
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गुटबाजी सामने आई
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया अभी भी संदेह के घेरे में नजर आती है। यहां आपसी मतभेद मनभेद में बदलते नजर आते हैं। चुनाव में अंतर्कलह है और आपसी गुटबाजी जगजाहिर है। केंद्र स्तर पर ही नहीं अब तो राज्य स्तर पर भी सत्ता और संगठन में मतभेद चरम पर पहुंचे हुए दिखाई देते हैं। पार्टी की गरिमा और अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उन नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होनी चाहिए, जो आंतरिक लोकतंत्र और संगठन को कमजोर करते हैं।
-एकता शर्मा, जयपुर
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सकारात्मक असर
भारत में लोकतंत्र का अत्यंत महत्व है। भारतीय राजनीतिक पार्टियों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के द्वारा ही अध्यक्ष का चुनाव किया जाना चाहिए। अत: कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष का चयन लोकतांत्रिक तरीके से होता है, तो जनता के भीतर कांग्रेस पार्टी के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा। दूसरे दलों को भी संदेश पहुंचेगा कि पार्टी में निष्पक्षता के लिए चुनाव प्रक्रिया अवश्य होनी चाहिए।
नूरजहां रंगरेज, भीलवाड़ा
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चुनाव प्रक्रिया में खामियां
कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में अनेक खामियां हैं, जिससे पार्टी में यथास्थिति बनी रहेगी,न तो पहले आंतरिक लोकतंत्र था,न भविष्य में रहेगा। हाईकमान आश्रित संचालन व्यवस्था बरकरार रहेगी। अध्यक्ष को चुनने वाले मतदाताओं डेलीगेट्स का चयन, हाईकमान के निर्देशानुसार ही हुआ है, उम्मीदवार हाईकमान ने चुना है, इसलिए यह नूरा कुश्ती है से ज्यादा कुछ नहीं।
-गिरीश कुमार जैन, कोटा