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आपकी बात: विलुप्त हो रही पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए सरकार की तरफ से क्या कदम उठाए जाने चाहिए?

पाठकों ने इस विषय पर विविध प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

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जयपुर

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Opinion Desk

Feb 26, 2026

समग्र संरक्षण की आवश्यकता

विलुप्त होती पक्षी प्रजातियों को बचाने के लिए सरकार को उनके प्राकृतिक आवास सुरक्षित करने होंगे। अवैध शिकार पर कठोर कार्रवाई, जलस्रोतों और वन क्षेत्रों का संरक्षण तथा व्यापक वृक्षारोपण अनिवार्य है। पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देते हुए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। दीर्घकालिक और व्यावहारिक संरक्षण योजना ही पक्षियों के अस्तित्व को सुरक्षित रख सकती है। - राकेश खुडिया, श्री गंगानगर

अभयारण्यों का विस्तार और सख्ती

पक्षियों की घटती संख्या को देखते हुए जंगलों और प्राकृतिक आवासों की रक्षा सर्वोपरि है। अवैध शिकार पर सख्त रोक लगाई जानी चाहिए। पक्षी अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या बढ़ाकर सुरक्षित क्षेत्र विकसित किए जाएं। साथ ही, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को प्रेरित करना आवश्यक है। - रविन्द्र वर्मा, रतलाम (म.प्र.)

जागरूकता और रसायनों पर नियंत्रण

पक्षियों के संरक्षण के लिए सार्वजनिक जागरूकता अभियान तेज किए जाने चाहिए। राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों का विस्तार हो तथा स्थानीय समुदायों को पक्षियों के महत्व से अवगत कराया जाए। कृषि में हानिकारक कीटनाशकों के उपयोग को नियंत्रित या प्रतिबंधित करना आवश्यक है। स्कूलों और मीडिया के माध्यम से पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना समय की मांग है। - प्रवेश भूतड़ा, सूरत

विशेषज्ञों की भागीदारी और जैविक खेती

पक्षी संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति और उनकी सलाह पर ठोस योजनाएं बनाई जानी चाहिए। वनों का विस्तार और व्यापक पौधारोपण जरूरी है। कृषि और बागवानी में रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक पद्धतियों को प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हो सके। - संजय डागा, हातोद

कानून से आगे बढ़कर क्रियान्वयन

पक्षी संरक्षण केवल कानून बनाने से संभव नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही परिणाम मिलेंगे। जंगलों, वेटलैंड्स और घास के मैदानों जैसे प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिए सख्त नीतियां लागू हों। अवैध शिकार और अंधाधुंध कटाई पर निगरानी बढ़ाई जाए। खेती में जहरीले रसायनों के उपयोग को कम कर पर्यावरण-अनुकूल उपाय अपनाए जाएं। शहरी विकास में भी हरित क्षेत्र और जलस्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। - कृष्णकुमार खीचड़, पीलवा

सुरक्षित वातावरण का निर्माण

पक्षियों का विलुप्त होना प्राकृतिक संतुलन और सौंदर्य दोनों के लिए हानिकारक है। उनके लिए सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। सरकार को विशेष पार्क और संरक्षित क्षेत्र विकसित कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि वे निर्भय होकर निवास और प्रजनन कर सकें। - वसंत बापट, भोपाल

संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विशेष उपाय

प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के साथ वन्यजीव कानूनों का सख्त पालन जरूरी है। अवैध शिकार और व्यापार पर रोक लगे तथा प्रजनन व पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएं। कीटनाशकों के उपयोग पर नियंत्रण हो और जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं। गिद्ध जैसी अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विशेष प्रजनन कार्यक्रम संचालित किए जाएं तथा प्रवासी पक्षियों के मार्ग सुरक्षित किए जाएं। - डॉ. मुकेश भटनागर, भिलाई (छत्तीसगढ़)

जनभागीदारी से संरक्षण

सरकार को व्यापक पक्षी-संरक्षण अभियान चलाना चाहिए। पेड़ों की कटाई पर रोक, नदियों-झीलों और उजड़े बाग-बगीचों का पुनरोद्धार तथा शिकारियों पर कड़ी सजा आवश्यक है। साथ ही नागरिकों को भी संवेदनशील बनना होगा। घरों के बाहर दाना-पानी रखना और हानिकारक अवरोधों से बचना जैसे छोटे कदम भी संरक्षण में सहायक हो सकते हैं। - विभा गुप्ता, बैंगलुरु

संरक्षित क्षेत्रों का सुदृढ़ीकरण

पक्षियों की प्रजातियों को बचाने के लिए राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य स्थापित कर प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित किया जाना चाहिए। शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध और आवास पुनर्स्थापन कार्यक्रम लागू हों। शिक्षा अभियानों के माध्यम से लोगों को संरक्षण के महत्व से अवगत कराकर सामूहिक प्रयास सुनिश्चित किए जाएं। - किरण जांगीड़, जयपुर

प्राकृतिक आवासों पर विशेष ध्यान

पक्षियों की घटती संख्या को देखते हुए सरकार को ठोस और त्वरित कदम उठाने होंगे। शहरीकरण के बीच कटते पेड़ों को रोककर प्राकृतिक आवास सुरक्षित किए जाएं। घातक कीटनाशकों पर प्रतिबंध और रेडिएशन मानकों का सख्त पालन जरूरी है। लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए विशेष प्रजनन केंद्र स्थापित हों और अवैध शिकार पर कठोर कार्रवाई की जाए। व्यापक जनजागरूकता ही स्थायी समाधान का आधार बनेगी। - नरेंद्र रलिया, भोपालगढ़ (जोधपुर)