
indian women
- डॉ. ऋृतु सारस्वत, समाजशास्त्री
विश्व का ऐसा कोई भी देश नहीं है जहां महिलाएं यौन उत्पीडऩ का शिकार नहीं होतीं। अपने ही घर से लेकर बाहर तक, महिलाओं के प्रति घोर असंवेदनशीलता बरती जाती है। विभिन्न रिपोट्र्स और सर्वेक्षण भी यही खुलासा करते हैं।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा और यौन शोषण के विरुद्ध एक अभियान में विश्वभर की हजारों लड़कियों ने ट्विटर पर ‘मी टू’ हैश टैग से ट्वीट किए हैं। इस ट्रेंड में भारत सहित दुनिया भर की अब तक हजारों महिलाएं प्रतिक्रियाएं दे चुकी हैं। भारत से इस टे्रंड में हजारों ट्वीट किए गए। ‘मुझे संदेह है, शायद ही कोई महिला इतनी किस्मत वाली होगी जिसने जीवन में कभी यौन शोषण की घटना का सामना न किया हो? यह ट्वीट विश्व की तमाम महिलाओं का वह सच है जिसे सामने लाने का साहस चंद महिलाएं ही कर पाती हैं।
विश्व भर में यौन हमले के सबसे ज्यादा मामले देश की राजधानी दिल्ली और ब्राजील के शहर साओ पाउलो में देखने को मिलते हैं। भारत में विवाहित महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा (37 प्रतिशत) अपने जीवन में कभी न कभी अपने पतियों द्वारा शारीरिक या यौन हिंसा का शिकार होता है। अनेक अध्ययन इस तथ्य को मिथ्या सिद्ध करते हैं कि उच्च शिक्षित एवं आत्मनिर्भर महिलाओं में शारीरिक उत्पीडऩ का प्रतिशत अशिक्षित और आर्थिक तौर पर अन्य पर निर्भर महिलाओं की अपेक्षा कम है। महिलाओं के साथ हो रही हिंसा के पीछे मूल कारण अहंकार है जो कि हर कीमत पर स्त्री को अपने वर्चस्व में रखना चाहता है और इसका सीधा सा रास्ता है महिलाओं पर शारीरिक चोट करना।
हमारा सामाजिक परिवेश ऐसा है जहां घर की बातें घर में रखना ही मर्यादोचित माना जाता है। स्त्रियों को बचपन से पुरुष अत्याचारों को अपनी नियति मानने की सीख दी जाती है। कोई महिला कानून की शरण में जाकर अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस कर भी ले तो उसके लिए यह संभव नहीं कि वह अपने जीवनसाथी या अन्य परिजनों से भावनात्मक सम्बन्ध कायम रख पाए। फिर ऐसे में महिलाओं के पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं या तो वह शारीरिक व मानसिक पीड़ा को नियति मान ले या फिर कानून का दामन थामकर अकेली हो जाए। दोनों ही स्थितियों में समाज बिखर जाएगा।
महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा रोकने की शुरुआत परिवार से ही हो सकती है। माता-पिता के रूप में बेटी के अधिकारों का संरक्षण, पति के रूप में पत्नी का समान अधिकार, बेटे के रूप में माता के प्रति दायित्व समाज में हिंसा के हर रूप को मिटा सकेगा। इन सबसे महत्वपूर्ण एक आरम्भ हर शोषणकर्ता को करने की आवश्यकता है जहां वह अपनी संवेदनहीनता त्यागते हुए कुछ पलों के लिए कल्पना करे कि अगर उसका परिवार स्त्रीविहीन हो जाए तो क्या उसका अस्तित्व शेष बचेगा? इस प्रश्न का उत्तर ही सभी समाधानों का मूल मन्त्र है।

Published on:
23 Oct 2017 12:32 pm
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