
छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग द्वारा रक्षाबंधन त्योहार के मद्देनजर 17 अगस्त से 23 अगस्त तक पूरे प्रदेश में बने खाबो बने रहिबो यानी कि अच्छा खाओ स्वस्थ रहो अभियान चलाया गया। त्योहारी सीजन में बिकने वाली मिठाइयां, मावा (खोवा), पनीर, घी, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करने के लिए यह अभियान चलाया गया था। इसके तहत प्रदेश में अस्वच्छ और बिना लाइसेंस के चल रहे खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापे मारे गए, सैंपल लिए गए और गंभीर अनियमितताओं पर सीलिंग व लाइसेंस निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई भी की गई। यहां तक तो सब सही नजर आता है कि सरकार को अपने नागरिकों की चिंता है..!
लेकिन इन सब कार्रवाइयों के बीच एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि खाद्य विभाग की यह कार्रवाई कागजी आंकड़ों तक ही सीमित है यानी कि विभाग त्योहारी रस्म अदायगी करते नजर आ रहा है। बने खाबो बने रहिबो अभियान समाप्त होने के चार दिन बाद भी खाद्य विभाग ने यह सार्वजनिक नहीं किया कि वो कौन-सी दुकानें और प्रतिष्ठान हैं, जहां मिलावटखोरी की जा रही थी, जहां की खाद्य सामग्री अमानक थी। त्योहारी सीजन में इस तरह के अभियान चलाकर खाद्य विभाग अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है। एक त्योहार के बाद दूसरा त्योहार आ जाता है, लेकिन खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं होती। मिलावटखोर दुकानों व प्रतिष्ठानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाते। ऐसा नहीं होने की वजह से आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ होता है, क्योंकि वे हर त्योहार पर मिलावटी मिठाइयां और खाद्य सामग्री खरीदते हैं।
खाद्य विभाग को चाहिए कि वह कार्रवाई के बाद जांच रिपोर्ट और मिलावटखोर प्रतिष्ठानों के नाम सार्वजनिक करे, ताकि उपभोक्ता अगली बार सतर्क रहे उन प्रतिष्ठानों की खाद्य सामग्रियों को लेकर। बने खाबो बने रहिबो भी तभी सफल होगा, जब किसी खाद्य सामग्री की वजह से किसी का त्योहार खराब न हो।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Updated on:
28 Aug 2026 02:16 am
Published on:
28 Aug 2026 02:16 am
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