
indian football team
- मनमोहन हर्ष, खेल समीक्षक
फुटबाल में पचास के दशक में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक से लेकर 1956 के मेलबोर्न ओलम्पिक के सेमीफाईनल में पहुंचने तक भारत की सर्वोच्च उपलब्धियां रही। पर योजनाबद्ध प्रयासों के अभाव में फुटबाल हाशिए पर ही रहा।
भारत की मेजबानी में पहली बार फीफा अंडर-17 विश्व कप हो रहा है। फीफा वल्र्ड कप के दौरान जब फुटबाल का जादू पूरी दुनिया को अपने आगोश में समेट लेता है तो भारतीयों का खेल-प्रेम भी फुटबाल की तान पर हिलोरे मारने लगता है। यूं तो देश के करोड़ों खेल प्रेमियों के फुटबाल पर फना होने की फितरत उन पर बेगानी शादी में अब्दुला दीवाना वाली तोहमत भी लगाती है। फुटबाल प्रेम पर तंज और फिकरे इसलिए कसे जाते है क्योंकि फुटबाल में न तो भारत की कोई खास हैसियत है और न ही हम कभी विश्व कप की शीर्ष 32 टीमों में क्वालीफाई कर पाए।
भले ही फुटबाल में भारत के विश्व पटल पर शक्ति के रूप में उभरने की बात दूर की कौड़ी हो, बावजूद इसके फुटबाल के प्रति अथाह प्रेम और श्रद्धा खेल प्रेमियों में देखी जा सकती है। माना जा रहा है कि देश की फुटबाल राजधानी कोलकाता साहित देश के विभिन्न मैदानों पर होने वाले यूथ वल्र्ड कप के मुकाबले देश में फुटबाल के जुनून को एक नए मुकाम पर ले जाएंगे। विश्व भर में फुटबाल के प्रतिभाशाली खिलाडिय़ों और प्रसिद्ध टीमों के मध्य पहली बार इस स्तर पर भारतीय टीम की जोर आजमाईश सोने पर सुहागे वाली बात होगी।
यह सही है कि क्रिकेट, हाकी, कुश्ती, भारतोलन, एथलेटिक्स, मोटर स्पोट्र्स और नौकायान आदि से लेकर स्नूकर, बिलियड्र्स, निशानेबाजी और तीरंदाजी तक में भारत के खेल सितारों ने अपनी सफलताओं के झंडे गाड़े हैं। गौरतलब है कि फुटबाल में पचास के दशक में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से लेकर वर्ष 1956 के मेलबोर्न ओलम्पिक के सेमीफाईनल में पहुंचने तक की भारत की सर्वोच्च उपलब्धियां रही हैं। लेकिन कालांतर में संस्थागत और योजनाबद्ध प्रयासों के अभाव में फुटबाल निरंतर हाशिए पर ही रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि भारत को इस युवा विश्व कप की मेजबानी मिलने से पहले तक अंडर-17 की कैटेगरी में अधिकृत रूप से हमारी कोई राष्ट्रीय फुटबाल टीम ही नहीं थी। गत ढाई-तीन सालों में यूथ टीम का गठन कर युवा विश्व कप के की तैयारी के नजरिए से लगातार दुनिया के नामी फुटबाल देशों का दौरा करा कर इस टीम के हुनर और प्रतिभा को तराशने का प्रयास किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि यह आयोजन देश में फुटबाल की सीरत और सूरत को बदलने का आधार बनेगा। साथ ही इस आयोजन से देश में फुटबाल की संस्कृति, खेल के प्रति नैसर्गिक चाहत और इसके रोमांच में सरोबार हो जाने की दीवानगी नए मुकाम पर होगी।

Published on:
06 Oct 2017 04:23 pm
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