
indian river water
- राजेन्द्र सिंह, पर्यावरणविद्
सितम्बर 2017 में ही तमिलनाडु व पूरा कर्नाटक सूखे की चपेट में आ गए । बुन्देलखंड क्षेत्र, केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ राज्य भी आधे से ज्यादा सूखाग्रस्त हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल आधे से कुछ कम सूखा ग्रस्त हैं।
भारत में आधे से ज्यादा छोटी नदियां सूख कर मर गई हैं। अब तो चन्द बड़ी नदियां ही नाले के रूप में समुद्र में जाकर मिलती हैं। बड़ी नदियां भी अब केवल वर्षा के दिनों में ही समुद्र तक पहुंचती हैं। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि हमारी नदियों को सुखाने का काम जंगलों की कटाई के साथ ही शुरू हुआ है। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत की 98 प्रतिशत नदियां भू-जल से ही बनती और बहती है। जैसे-जैसे भूजल खाली होता है, वैसे ही नदियां सूख जाती हैं। इसके साथ ही मैं यह भी स्पष्ट कर दूं कि सूखी नदियों को पुनर्जीवित करना बहुत कठिन नहीं है।
यह बहुत ही सरल और आसान काम है। हम वर्षा के जल को मिट्टी को घोल कर अपने साथ बहा ले जाने से रोकें। धरती का पेट शुद्ध पानी से भरना होगा। धरती का पेट भरते ही अंदर के जल दबाव से जल स्रावित होता है। जल स्राव की बहुत सारी धाराएं मिलकर ही नदी का प्रवाह बनाती हैं। हमें नदियों को शुद्ध सदानीरा बनाकर भारत की खेती, व्यापार और जीवन को दुरुस्त करने के इस रास्ते पर चलना होगा। सवाल यह उठता है कि इसके लिए क्या करना होगा? सबसे पहले तो हमें इस रास्ते पर चलने के लिए जहां पानी बरसता है और मिट्टी को साथ लेकर दौडक़र चलता है, उसे धरती का खुला पेट देखकर उसमें बैठा देना होगा। फिर उसको सूरज की नजर नहीं लगेगी अर्थात पानी उड़ेगा नहीं।
जब वाष्पीकरण नहीं होगा तो धरती का पेट पानी से भर जाएगा। वही जल, धरती से निकलकर झरने का रूप लेकर, जल धारा बनाएगा और बहुत सारी जलधाराएं मिलकर नदियां बनाएंगी। हमने तो पूरे भारत में इसी प्रकार का काम करने का संकल्प लिया है। जिन जिलों में सूखा है, वहां बीजापुर ‘राष्ट्रीय जल सम्मेलन’ की जल घोषणाओं के प्रकाश में वर्षा जल को सहेजने का कार्य शुरू किया है। पूरे भारत देश में ‘जल बिरादरी’ और ‘जल जन जोड़ो अभियान’ के लोग बाढ़-सूखा मुक्त भारत बनाने के लिए अपने-अपने कार्य क्षेत्र में जुटे हुए हैं। हमने भारत भर के सभी राज्यों में छोटी-छोटी नदियों पर एक-एक, दो-दो गावों में जल संरक्षण के लिहाज से ‘सामुदायिक विकेन्द्रित जल प्रबंधन’ के काम भी शुरू किए हैं।
हमारा समाज देश भर में इस काम को अपना काम मानकर स्वयं करने लगा है। इस अनुभव को विस्तार देने के उद्देश्य से जल साक्षरता का एक राष्ट्रीय अभियान भी शुरू हुआ है। इसका पहला सम्मेलन कर्नाटक के बीजापुर में था और दूसरा सम्मेलन बुन्देलखण्ड में इसी साल नवंबर में होगा। लोगों को सूखा और बाढ़ मुक्त बनाने के लिए यह अभियान पूरे जोरों से देश भर मे चलाया जा रहा है। समाज के सभी वर्गों को जल साक्षरता के लिए प्रशिक्षित करने का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी भारत भर में शुरू किया गया है। इसके तहत उन्हीं के कार्य क्ष़ेत्रों में जा कर उन्हे जल संरक्षण कार्य समझने, जल सहेजने, जल के सभी पक्षों को लोगों को समझाने तथा जल के अतिक्रमण, प्रदूषण व शोषण को रोकने के लिए ‘जल जुम्बिश’ योजना शुरू की गई है।
इस जल जुम्बिश का नाम ‘जल जन जोडो अभियान’ रखा है। इसकी शुरुआत का कारण बिल्कुल साफ है। देश के ज्यादातर इलाकों में सूखा या पानी की कमी अकसर देखने और सुनने को मिल रही है। हालात ये हो गए हैं कि सितम्बर 2017 में ही तमिलनाडु और पूरा कर्नाटक सूखे की चपेट में आ गए । बुन्देलखण्ड क्षेत्र जिसमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 13 जिलो आते हैं, केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ राज्य भी लगभग आधे से ज्यादा सूखाग्रस्त हैं। मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, उत्तराखण्ड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल आधे से कुछ कम सूखाग्रस्त हैं।
प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक सितम्बर के पहले सप्ताह में ही भारत के 254 जिले और 19 राज्य सूखा प्रभावित हो गए थे। यह सूखा, नदियों को जोडक़र मिटाया जा नहीं जा सकता है। सोच समझकर पर्यावरणीय दृष्टि से जहां उचित हो वहां नदियों को तालाबों से जोडऩा उचित है। उदाहरण के तौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि राज्यों में नदियों को तालाबों से जोडऩा उचित होगा। इस कार्य में हमारा सरकारी खजाना खाली नहीं होगा। देश के गरीब से गरीब गांवों के लगभग सभी समुदायों को जीने के लिए अन्न, जल व काम मिलेगा। खेती व व्यापार के लिए जल के रूप में एक बड़ा सहारा भी उपलब्ध हो सकेगा।
मेरा तो स्पष्ट तौर पर मानना है कि इस कार्य से जल विवादों में न केवल कमी आएगी बल्कि यह धीरे-धीरे करके मिटेगा अन्यथा बिना सोचे-समझे नदी जोडऩे के काम से तो जल विवाद बढ़ेगा ही। और, इसीलिए हमें जल संरक्षण का सामुदायिक प्रबंधन करना चाहिए। इक्कीसवी शताब्दी के लिए इसकी आवश्यकता है। भारत में सुशासन के लिए देश का बाढ़ और सूखा मुक्त होना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार और समाज सभी को इस कार्य में तत्काल जुट जाना चाहिए। भारत बाढ़ और सूखा़ मुक्त देश बन सकता है। बाढ़-सूखों को सहवरण करने योग्य बनाया जा सकता है। हमें तत्काल मिलजुल कर भारत को बाढ़ व सूखा मुक्त बनाने के कार्य में जुट जाने की जरूरत है। इसी कार्य से भारत की सभी छोटी-छोटी नदियों के पेट में पानी रहेगा। सूखी नदियां पुन: जीवित होकर शुद्ध सदानीरा बन जाएगी।

Published on:
06 Oct 2017 04:20 pm
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