
pm narendra modi, work and life, opinion, rajasthan patrika article
भारत जैसे विकासशील और विविधतापूर्ण देश में कोई ऐसी बैठक किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है, जिसमें प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ उपस्थित हों। काश! भारत के नीति आयोग की ऐसी महत्त्वपूर्ण बैठक साल में मात्र एक बार न होकर तीन-चार बार होती। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को एक दूसरे की नीति-रीति को समझने के ज्यादा मौके मिलते और नीति व विकास के ठोस नतीजे सामने आते। नीति आयोग की बैठक में जो बातें सामने आई हैं, या जो बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कही हैं, उनमें कोई चौंकाने वाली बात नहीं है।
देश की आर्थिक विकास दर को दहाई अंक में ले जाना चुनौती है। देश ६.७ प्रतिशत की दर से विकसित हो रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने मात्र चौथी तिमाही की विकास दर 7.7 प्रतिशत का ही हवाला दिया है। प्रधानमंत्री या सरकार की राजनीतिक मजबूरी को समझा जा सकता है। वास्तव में भारत जैसे युवा बहुल देश में विकास दर को दो अंकों में होना ही चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से जिस गति से निवेश बढऩा चाहिए, जिस गति से उद्योगों में बढ़त जरूरी है, जिस गति से रोजगार बढऩे चाहिए, वैसा नहीं हो रहा। राज्यों को होने वाला आर्थिक आवंटन स्वाभाविक ही बढ़ता चलता है, इसमें खुशी जताने जैसी कोई विशेष बात नहीं है।
नीति आयोग के जरिये पिछले वर्ष सपना दिखाया गया था कि वर्ष २०२२ तक गरीबी, गंदगी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद, सांप्रदायिकता- जैसी देश की छह समस्याओं से आजादी मिल जाएगी, लेकिन इस दिशा में नीति आयोग की पहल बहुत धीमी है। नीति आयोग नया भारत-२०२२ का दस्तावेज तैयार करने में जुटा है। कायदे से इस दस्तावेज को नीति आयोग की बैठक में पेश कर दिया जाता, तो एक नई ठोस बात हो जाती। तीन साल का कार्रवाई एजेंडा, ७ साल का रणनीतिक एजेंडा और १५ साल का विजन दस्तावेज सामने आ जाना चाहिए था, लेकिन समयानुकूल-समयबद्ध नीतियों के लिए जो दृढ़ नीयत चाहिए, शायद उसका अभाव है।
नीयत या इच्छाशक्ति दृढ़ न हो, तो नीतियां कागज पर ही खराब नियति का शिकार होने लगती हैं। योजना आयोग को नीति आयोग किया गया था, अब बीमारू जिलों को आकांक्षी जिले कहा जाएगा! मात्र शब्दावली बदलने से विकास में तेजी आती है, तो स्वागत है। सरकार यह देखे कि देश क्या चाहता है। यह बोलने का नहीं, करके दिखाने का समय है। एक साथ चुनाव की चर्चा फिर छिड़ी, लेकिन पहले बताया जाए कि देश को इससे कैसे कितना फायदा होगा। सबसे अच्छा तरीका यही है कि सबको विश्वास में लेकर चला जाए।
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.