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PATRIKA PODCAST : अतिथि भी प्राकृतिक संयोग

पति-पत्नी भी पहली बार अतिथि के रूप में ही मिलते हैं। बाद में एक-दूसरे के भविष्य निर्माण में सहयोगी हो जाते हैं। सन्तान भी अतिथि ही है। जीवन में उसकी भी भूमिका महत्वपूर्ण ही है, भले ही वह स्वतंत्र जीव है।
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Gulab Kothari Article : प्रकृति ने हमें तीन देव अलग से दिए हैं। मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्य देवो भव। तीनों क्रमश: व्यक्ति के क्षर-अक्षर-अव्यय भाग के नियंता हैं। मूल में तो तीनों भी अतिथि ही हैं। प्रकृति ही हमारे प्राकृतिक जीवन का संचालन करती है। पुत्र हो अथवा शिष्य, इनको भी अतिथि रूप में ही भेजती है।