
डॉ. चंद्रकान्त लहारिया
संस्थापक निदेशक, जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं प्रतिष्ठान, नई दिल्ली
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यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की अवधारणा जोर देती है कि ‘सभी लोगों के लिए’ गुणवत्ता वाली, प्रभावी तथा पर्याप्त निवारक, उपचारात्मक, तथा नैदानिक स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हों। यूएचसी के तहत यह सुनिश्चित करने की बात आती है कि स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल के समय लोगों को किसी भी तरह की वित्तीय कठिनाई का सामना न करना पड़े।
आज से ठीक दस वर्ष पहले, 12 दिसंबर 2012 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ ने ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ (यूएचसी) के लिए एक विशेष प्रस्ताव पारित किया था। इससे पहले 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यूएचसी पर चर्चा शुरू की थी। सयुंक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव पारित होने से यूएचसी का मुद्दा स्वास्थ्य मंत्रियों के दायरे (जो विश्व स्वास्थ्य सभा में भाग लेते हैं) से राष्ट्र प्रमुखों और विदेश मंत्रियों के दायरे में आ गया (जो संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेते हैं।) उसी साल विश्व प्रसिद्ध जर्नल ‘द लान्सेट’ ने यूएचसी को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ‘शक्तिशाली विचारधारा’ के रूप में सराहा। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव की याद में वर्ष 2017 से हर 12 दिसंबर को आधिकारिक रूप से 'अंतरराष्ट्रीय यूएचसी दिवस’ के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हुई। इस वर्ष की थीम है - हम जैसा विश्व बनाना चाहते हैं, उसका निर्माण करें: सभी के लिए स्वस्थ भविष्य (बिल्ड द वल्र्ड वी वांट: ए हेल्थी फ्यूचर फॉर ऑल)।
भारत ने शुरुआत से ही यूएचसी के लिए अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई और देश का राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम इस विचारधारा से प्रेरित रहा है। फिर, 2017 में जारी हुई तीसरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भले ही इस विचारधारा को समझा है लेकिन इस दिशा में पर्याप्त प्रगति करने के लिए यह आवश्यक है कि निर्वाचित प्रतिनिधि (जो नीति और योजना बनाने में शामिल होते हैं) और आम आदमी/महिलाएं (जो इन नीतियों के लाभार्थी बनते हैं) भी यूएचसी के बारे में और बेहतर समझ हासिल करें।
यूएचसी का एक आम आदमी या परिवार के लिए क्या मतलब होगा, इसे समझने के लिए आइए समाज के सबसे गरीब और हाशिये पर खड़े व्यक्ति के बारे में सोचें। आइए समझें कि एक सुदूर गांव में रहने वाली एक गरीब आदिवासी बूढ़ी विधवा महिला, या फिर एक महानगर में दूर-दराज के गांव से आया हुआ मजदूर जो अपनी पत्नी एवं तीन बच्चों के साथ रहता है या फिर एक शहर में गरीब सब्जी बेचने वाले शख्स, जिसकी नियमित आमदनी नहीं है - के लिए यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का क्या अर्थ होगा?
जवाब है, यूएचसी का मतलब होगा कि जब इनमें से किसी के भी परिवार के सदस्य को जरूरत होगी, तो उन्हें अधिकतम 30 मिनट (चल कर जा सकने वाली दूरी) पर वांछित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। स्वास्थ्य सेवाओं का चयन करने का उनका निर्णय, उनकी जरूरत और स्वास्थ्य समस्या पर निर्भर करेगा, न कि उनकी रहने की जगह या आय पर। उनके पास स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के पर्याप्त विकल्प होंगे और जब विशेष देखभाल की आवश्यकता होगी, तो उन्हें अगले उच्च स्तर के प्रदाताओं की ओर से सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के बारे में उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं होगी और आश्वासन होगा कि सरकार ने न केवल पुख्ता व्यवस्थाएं की हुई हैं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी अच्छी है। ऐसे लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उनके वित्तीय सामथ्र्य के भीतर होगी और स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग उन्हें गरीब नहीं बनाएगा।
यूएचसी को भारत में चल रहे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से भी समझा जा सकता है। भारत में टीकाकरण कार्यक्रम के तहत, सरकार देश के सभी बच्चों को चुनिंदा टीके निशुल्क उपलब्ध कराती है। इनके अलावा भी कुछ अतिरिक्त टीके होते हैं जो सिर्फ निजी क्षेत्र में, भुगतान के आधार पर उपलब्ध हैं। लोग अपने बच्चों के लिए सुविधा के अनुसार टीकाकरण का विकल्प चुनते हैं द्ग सार्वजनिक या निजी क्षेत्र। टीकाकरण सेवाओं के कारण कोई भी परिवार कभी भी गरीब नहीं हुआ है। अगर ऐसा अन्य सभी जरूरत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी हो जाए तो वह स्थिति यूएचसी के करीब की स्थिति होगी। कुछ राज्यों द्वारा प्रस्तावित ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ इस दिशा में प्रगति को तेज कर सकता है।
पिछले तीन सालों में कोविड-19 की महामारी ने सभी देशों में स्वास्थ्य तंत्र और सेवाओं की खामियों को उजागर किया है। कई देशों में नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आई है, जैसे कि टीकाकरण के स्तर में गिरावट जो खसरे के फैलने के रूप में देखी जा रही है। सभी देशों में स्वास्थ्य तंत्र की चुनौतियों को पहचाना गया है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के महत्त्व को भी फिर से पहचाना गया है।
इस सन्दर्भ में आज का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज दिवस बहुत महत्त्वपूर्ण है। भारत में भी 10 और 11 दिसंबर 2022 को इस विषय पर सभी राज्यों के साथ वाराणसी में एक बड़ा स्वास्थ्य सम्मलेन और चर्चा हुई। सितंबर 2023 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूएचसी पर एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। लेकिन यह समय सिर्फ चर्चाओं तक ही सीमित रहने का नहीं है। आज का दिन स्वास्थ्य सम्बन्धी सभी प्रतिबद्धताओं को फिर से दोहराने का है और योजनाओं को अमलीजामा पहनाने और जमीनी स्तर पर लागू करने का भी है।
जिस दिन भारत का सबसे गरीब, कमजोर और हाशिये पर खड़ा व्यक्ति, जैसे कि सुदूर गांव में रहने वाली गरीब, आदिवासी, बुजुर्ग, विधवा महिला बिना किसी चिंता और हिचकिचाहट के स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले पाने में सक्षम होगी, सच्चे अर्थों में वही दिन ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ की अवधारणा के भारत में साकार होने का दिन माना जाएगा।
Updated on:
12 Dec 2022 09:09 pm
Published on:
11 Dec 2022 07:33 pm
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