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अफसरों को विलंब से चल रही रेल के यात्रियों का दुख-दर्द सुनना चाहिए, तो पता चलेगा कि रेल मंत्री ने जो सजा सुनाई है, वह बहुत मामूली है।

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Sunil Sharma

Jun 05, 2018

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भारतीय रेल की लेटलतीफी के कारण रेल अधिकारियों की पदोन्नति रुकने की शुरुआत अगर वाकई होने वाली है, तो यह फैसला स्वागतयोग्य और ऐतिहासिक है। स्वयं रेल मंत्री बता रहे हैं, ३० प्रतिशत यात्री गाडिय़ां लेट चल रही हैं, लेकिन रेल तंत्र का कुप्रबंधन देखिए, कोई रेल अगर २४ घंटे से भी ज्यादा विलंब से मंजिल तक पहुंचती है, तब भी अधिकारियों की सेहत-नौकरी पर कोई फर्क नहीं पड़ता। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेल के सभी जोनल प्रमुखों को चेतावनी दी है कि वे रेलों का समय से परिचालन करें।

उत्तर रेलवे के जोन प्रमुख की ज्यादा खिंचाई हुई है, जहां लगभग ५० प्रतिशत गाडिय़ां लेट चल रही हैं। छुट्टियों के मौसम में जब गाडिय़ों पर सर्वाधिक दबाव होता है, तब गाडिय़ां देर से चलाई जा रही हैं और रेलवे ट्रेक सुधार-विकास का हवाला दिया जा रहा है। रेल मंत्री ने रेलवे अधिकारियों के इस बहाने को खारिज कर सही कदम उठाया है। रेलवे समय के साथ जो खिलवाड़ कर रहा है, उसकी शिकायत प्रधानमंत्री तक भी पहुंची थी और उसके बाद ही रेल मंत्री ने रेल के आला अधिकारियों को चेताया है कि वे सुधार करें, अन्यथा परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह खबर उन रेल यात्रियों और उनके इंतजार करते परिजनों के लिए खुशखबरी है, जिन्होंने रेल की लेटलतीफी को कई प्रकार से भुगता है।

भारतीय रेलवे में प्रतिदिन २४० लाख लोग सफर कर रहे होते हैं। यदि ३० प्रतिशत गाडिय़ां देर से चल रही हैं, तो ऐसे ७२ लाख यात्री हैं, जो देर से अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं। देखा जाए तो गाडिय़ों का लेट होना ७२ लाख लोगों के समय, जेब, सेहत और जिंदगी — चारों से खिलवाड़ है। जो गाडिय़ां विलंब से चलती हैं, उनमें रेलवे के अफसरों को बैठकर यात्रियों का दुख-दर्द सुनना चाहिए, तो पता चलेगा कि रेल मंत्री ने लेटलतीफी की जो सजा सुनाई है, वो बहुत मामूली है। वैसे भी सब जानते हैं, रेलवे में दोषियों पर कार्रवाई दिखावे की होती है। जो ठेकेदार यात्रियों को चाय पिलाने के लिए बोगी टॉयलेट से पानी लेता है, उसे मात्र १ लाख रुपया जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है।

आप रेलवे में भ्रष्ट, अयोग्य, मिलावटखोर, लापरवाह लोगों को पालेंगे-आगे बढऩे देंगे, तो कैसे होगा सुधार? अब रेल मंत्री ने जो चेतावनी दी है, वह साकार होनी चाहिए। तभी शायद स्विटजरलैंड जैसे वो अच्छे दिन आएंगे, जब ट्रेन का इंतजार करते लोग घड़ी देख दुखी नहीं होंगे। जब एकदम समय से गाड़ी प्लेटफार्म आएगी, तब लोग अपनी घड़ी का समय ठीक करेंगे। रेल मंत्री ही नहीं, देश के लोग भी यही चाहते हैं।