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राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश में प्रवेश किया- इन्दौर से। क्षेत्र था मालवा—निमाड़। राऊ, खरगोन, बड़वानी, खंडवा, ओंकारेश्वर, भोपाल मुख्य मार्ग था। राजस्थान में कांग्रेस सरकार है, मध्यप्रदेश में भाजपा की।

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गुलाब कोठारी
राजस्थान के बाद मध्यप्रदेश में प्रवेश किया- इन्दौर से। क्षेत्र था मालवा—निमाड़। राऊ, खरगोन, बड़वानी, खंडवा, ओंकारेश्वर, भोपाल मुख्य मार्ग था। राजस्थान में कांग्रेस सरकार है, मध्यप्रदेश में भाजपा की। दोनों ओर मतदाता के लिए विशेष योजनाओं की बरसात हो रही है। चुनाव के बाद इन योजनाओं का क्या होगा, कोई नहीं जानता। जनता भी इसके आगे नहीं सोचती। आयकर दाता धन की इस बंदरबांट से अन्तर्मन से दु:खी है। नियम-कायदों, स्थानीय करों में निर्ममता भी प्रत्यक्ष है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कड़ी दौड़-धूप कर रहे हैं। एक तरफ कल्याणकारी घोषणाएं हो रहीं है, दूसरी तरफ आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा की स्थापना जैसे बड़े आयोजन। देश भर के सभी प्रमुख संतों को आमंत्रित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी घोषणाओं का जवाब घोषणाओं से दे रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों मतदाता सूचियों को खंगालने में लगे हैं क्योंकि पिछली बार कांग्रेस को इंदौर शहर में करारा झटका लगा था। भाजपा की ताकत बूथ स्तर के शक्तिशाली कार्यकर्ता और मोदी हैं। कांग्रेस भी बूथस्तर पर तैयारी कर रही है।
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औरतें 'लाडली बहना' योजना से खुश हैं, किसानों के खातों में 12000 रुपए प्रति वर्ष पहुंच रहे हैं किन्तु मकान बनाने के लिए शहरों में ढाई लाख और गांवों में एक लाख रुपए की सहायता दी जाती है। लागत गांवों में अधिक आती है। सामान शहरों से ढोना पड़ता है। सबसे बड़ा मतदाता किसान है। सरकार कुछ कहती है, अधिकारी कुछ ओर करते हैं। आत्महत्याएं बढ़ी हैं। किसान की लागत वसूल हो, उसके पहले सरकारी और मण्डी की नीतियों में फेरबदल होता रहता है। मध्यप्रदेश में किसानों के संगठन अगले माह से आन्दोलन शुरू कर रहे हैं। योजनाओं की क्रियान्विति अधिकारी तय करते हैं।

निमाड़ क्षेत्र में युवाओं के दो चेहरे नजर आए। इस क्षेत्र में नदियों, नहरों और जलाशयों की भरमार है। जिनके पास जमीन है, वे समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। बहुत से युवा महानगरों से अपनी नौकरियों छोड़कर लौट आए हैं और खेती में जुट गए हैं। दूसरी और बहुत से युवा दु:खी नजर आए। उनका कहना था कि परीक्षाओं में पर्चे लीक, भर्ती का अभाव, मजदूरी में अभाव, छोटा भुगतान, महंगाई जैसी समस्याओं ने युवा वर्ग को पलायन के लिए मजबूर कर रखा है। लगभग लाख—डेढ़ लाख युवा मजदूरी के लिए अन्य प्रदेशों में जाते हैं। यहां उनको इतनी मजदूरी भी नहीं मिलती। भविष्य बाहर ही नजर आता है।
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राजस्थान और मध्यप्रदेश में सरकारें उदार हैं, मगर अधिकारी इस बार सर्वाधिक भ्रष्ट माने जा रहे हैं। सरकार के नियंत्रण में दिखाई नहीं देते। जनता की ओर देखना ही भूल गए हैं। संवेदनशीलता इनके व्यवहार से विदा हो चुकी है। निमाड़ क्षेत्र इस समय पूरी तरह आन्दोलित है। नर्मदा के बड़े बांधों बरगी, इंदिरासागर, ओंकारेश्वर के फाटक एक साथ खोल दिए। कुछ लोगों ने आरोप लगाए कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सरदार सरोवर पूरा भरा दिखाई दे। पीछे के गांव डूब में आ गए। पानी रोकने का एक कारण 18 सितम्बर को शंकराचार्य की प्रतिमा के अनावरण के कार्यक्रम को भी बताया गया। वह मार्ग बन्द हो रहा था। कार्यक्रम को आगे खिसकाकर सरकार ने सारे गेट बिना किसी भी सूचना के एक साथ खोल दिए। गांवों में सारे मकान पूरे—पूरे डूब गए। नर्मदा खतरे के निशान से ऊपर बह चली। कांग्रेस विधायक विजयलक्ष्मी साधौ ने वीडियो दिखाए- जहां कोई व्यक्ति सहायता के लिए नहीं पहुंचा। ऐसे ही मुद्दे पर पहले भी बैतूल में जल सत्याग्रह हुआ था। विस्थापितों को बसाने और मुआवजा देने के लिए। आज तक भटक रहे हैं। अफसर आज भी अंग्रेेज हैं। इस क्षेत्र में तो आज यही सबसे बड़ा मुद्दा है। सरकार को ही समेटना है। खरगोन में रामनवमी जुलूस में 13 स्थानों पर बम ब्लास्ट हुए थे। पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई थी। महू में आदिवासी युवक की पुलिस की गोली से हत्या का मामला अभी गर्म है। इसका एक कारण यह भी है कि पश्चिम निमाड़ क्षेत्र आज कांग्रेस से आच्छादित है।

कांग्रेस को आशा है कि पिछले चुनाव बाद ज्योतिरादित्य ने उसके साथ जो धोखा किया था, उसका बड़ा लाभ मिलेगा। वे सारी सीटें भी उसको मिल जाएंगी। राहुल गांधी के उभरते व्यक्तित्व से भी उत्साहित हैं। चुनाव पूर्व किसी कांग्रेस नेता के यहां छापा पड़ने की भी प्रतीक्षा कर रहे हैं। कांग्रेस में कार्यकर्ता कम और भाषण देने वाले ज्यादा हैं। सत्ताभोगी भी हैं। जो बातें वे कहते हैं, उनका प्रतिकार काम से नहीं होता। यदि कांग्रेस को चुना जाता है तो भाजपा को हराने के लिए। अथवा उनको डेढ़ साल में ही हटा देने की कूटनीति के कारण। जन संवेदना और भाजपा के दो दशकों के बीच चुनाव होगा। हिन्दुत्व का प्रभाव कितना होगा प्रत्याशी तय करेगा।