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Patrika Opinion: मौसम पर खेती की निर्भरता कम हो

यह सही है कि भारत में खेती का पूरा दारोमदार मानसून की स्थिति पर टिका है। देश की 60 प्रतिशत से अधिक खेती मानसून पर निर्भर है। हमारी दो तिहाई से अधिक आबादी कृषि के माध्यम से ही अपनी जीविका चलाती है। कहा भी जाता है कि अच्छा मानसून तो खेती भी बेहतर, और कमजोर मानसून तो पैदावार भी कम।

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Patrika Desk

Jun 02, 2022

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

मौसम विभाग ने देश में इस बार अच्छे मानसून का अनुमान लगाया है। इसमें औसत की 103 प्रतिशत बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। विभाग का यह भी आकलन है कि देश में अब सामान्य से कम बारिश का दौर बीत रहा है। आने वाले समय में सामान्य मानसून का युग आएगा। इन अनुमानों से उम्मीद की जा सकती है कि देश में भरपूर खेती होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

यह सही है कि भारत में खेती का पूरा दारोमदार मानसून की स्थिति पर टिका है। देश की 60 प्रतिशत से अधिक खेती मानसून पर निर्भर है। हमारी दो तिहाई से अधिक आबादी कृषि के माध्यम से ही अपनी जीविका चलाती है। कहा भी जाता है कि अच्छा मानसून तो खेती भी बेहतर, और कमजोर मानसून तो पैदावार भी कम। हालांकि, अच्छे मानसून का अर्थ यह भी नहीं है कि सभी जगह समान बारिश होगी। खासतौर पर मध्य और पश्चिमोत्तर क्षेत्रों में असमान बारिश को लेकर खतरा रहता है। मौसम विभाग का अनुमान देश की कुल बारिश को लेकर है, न कि क्षेत्रवार वर्षा के वितरण पर। फिर भी मौसम विभाग के इन अनुमानों से देश की खेती को नई उम्मीद जगी है।

सवाल है कि मानसून का भरपूर फायदा किसानों को कैसे मिले, क्योंकि अभी तक की स्थिति बताती है कि ज्यादातर राज्यों में निचले स्तर पर किसानों का मार्गदर्शन करने के लिए कोई प्रभावी सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है। निचले स्तर पर किसानों के पास आज तक भी यह सूचना नहीं पहुंच पाती कि उनके क्षेत्र में बारिश कब होगी। ऐसे में किसान अपने अनुमान के हिसाब से खेती करता है। इसमें जोखिम के कारक ज्यादा रहते हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य मेें मौसम की स्थिति को लेकर ज्यादा जोखिम नजर आ रहे हैं। इसका असर अभी से असामान्य मौसम के रूप में नजर आने लगा है। तय है कि इसका प्रतिकूल असर खेती पर भी आएगा। इससे बचाने के लिए सरकार को ऐसी कार्य योजना पर काम करना होगा, जो खेती के रिस्क फैक्टर को कम कर सके और उन्हें उपज में फायदा दे सके। देश में खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए यह आवश्यक भी है, क्योंकि हम खेती को सिर्फ मौसम के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। खेती हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे मजबूत बनाए रखना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। सरकार को इस दिशा में दूरगामी कार्ययोजना के साथ काम करने की आवश्यकता है। जाहिर है कि वर्षा जल संचयन का व्यापक आधारभूत ढांचा भी ऐसी कार्ययोजना का मजबूत आधार सिद्ध हो सकता है।