'सेवा' ने सदा से ही बरगद के पेड़ के सिद्धांत का अनुकरण किया है। अन्य संगठनों के साथ मिल कर इसकी शाखाएं फैल कर अनंत मॉडल का स्वरूप ले रही हैं। प्रत्येक नई पहल का एक नया नेता होता है। इला भट्ट की कार्यशैली आम तौर पर गरीब महिलाओं, उनकी आजीविका व उनके समग्र सशक्तीकरण पर आधारित थी।
प्रो. एम.एस. श्रीराम
सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी, आइआइएम-बी
जब मैंने इला भट्ट के निधन का समाचार सुना, तो स्तब्ध रह गया। इला भट्ट उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती थीं, जो सिद्धांतों पर अडिग रही। वह अच्छे सरोकारों के लिए अपना पक्ष रखने में हिचकती नहीं थीं। वह ईमानदार, गांधीवादी, आदर्शवादी और व्यावहारिक थीं। मृदुभाषी इला भट्ट ने गरीब महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 70 के दशक में उन्होंने स्वरोजगारी महिलाओं के संघ-सेल्फ एम्पलॉइड वुमेन एसोसिएशन (सेवा) की शुरुआत की।
'सेवा ' की स्थापना उन्होंने एक ट्रेड यूनियन के तौर पर की थी। पंजीकरण से 'सेवा' को पहचान और विश्वसनीयता मिली। संस्था के सदस्य सार्वजनिक स्थलों पर असंगठित क्षेत्रों में कार्य करते थे। कचरा बीनने वाले, अपशिष्ट पुनर्चक्रणकर्ता, सब्जी बेचने वाले और रेहड़ी ठेले वालों को अधिकारियों से संरक्षण चाहिए था। असंगठित क्षेत्र में वार्ता का स्तर सरकार तक पहुंच गया था। महिलाओं को वित्तीय सेवाओं की जरूरत थी। बचत के लिए सुरक्षित विकल्प और ऐसे माध्यम की जरूरत थी, जहां से वे उधार ले सकें। यहीं से बैंक बनाने का विचार आया और साथ में बीमा का। सेवा बैंक की स्थापना 'माइक्रोफाइनेंस ' जैसे शब्द के चलन और स्वयं सहायता समूहों के गठन से काफी पहले हो गई थी। बीमा संगठन 'विमो सेवा ' का गठन इसलिए किया गया ताकि बीमारी, दुर्घटना, दंगे ओर अन्य आपदाओं का प्रभाव कम किया जा सके। जब बीमा एजेंसियों ने महिलाओं का मातृत्व बीमा करने से इनकार कर दिया तो सेवा ने प्रसूति के महीनों में होने वाले जीवन के नुकसान के लिए बीमा कवर शुरू किया।
'सेवा' ने सदा से ही बरगद के पेड़ के सिद्धांत का अनुकरण किया है। अन्य संगठनों के साथ मिल कर इसकी शाखाएं फैल कर अनंत मॉडल का स्वरूप ले रही हैं। प्रत्येक नई पहल का एक नया नेता होता है। इला भट्ट की कार्यशैली आम तौर पर गरीब महिलाओं, उनकी आजीविका व उनके समग्र सशक्तीकरण पर आधारित थी। संगठन का पसंदीदा स्वरूप था-को-ऑपरेटिव, जहां लोगों की संख्या, पूंजी राशि से अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। दूसरा तत्व था-स्पष्टता यानी उन्हें क्या नहीं करना है। एक ओर जहां उन्होंने आजीविका और वित्तीय सुरक्षा के जरिए महिला सशक्तीकरण के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया, वहीं असंगठित क्षेत्र की गरीब महिलाओं पर काफी करीब से फोकस किया। एक ओर जहां वह 'सेवा ' परिवार की महिलाओं की समस्याओं के समाधान तलाशने में जुटी थीं, वहीं वह योजना आयोग, राज्यसभा और आरबीआइ के केंद्रीय बोर्ड की सदस्य होने के नाते सरकार के साथ भी जुड़ी थीें। इन दोनों ही भूमिकाओं में वह नीति स्तरीय समाधान तलाश करती रहीं, जिससे गरीब और असंगठित क्षेत्र की वंचित महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। 'सेवा ' परिवार में कई महिला नेता मिल जाएंगी, जो इला भट्ट के सांचे में ढली हैं। उनकी दैहिक यात्रा भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन जिन मूल्यों को उन्होंने जीया, वे आत्मसात करने होंगे।