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निर्बन्ध : चंगुल

उन सबको कर्ण ने रोक रखा था किंतु अब अर्जुन आ गया था और कर्ण जैसे उसके चंगुल में फंस गया था।... दुर्योधन और कर्ण दु:शासन को देख भर सकते थे, वे न तो उसके लिए रथ ला सकत थे, न सारथि।
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सवाई माधोपुर

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Rajeev sharma

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Updated: 8 Feb 2017, 11:44 AM IST

तुम लोगों को तुम्हारे माता-पिता सहित वारणावत में जला डाला था।... तुम लोग बचकर कांपिल्य पहुंच गए तो जाने द्रौपदी ने किस भ्रम में अर्जुन का वरण कर लिया। और तुम पांचों ने उसके साथ ऐसा नीच कर्म किया कि उसे पांचों की पत्नी बना लिया। क्यों नहीं करते। तुम्हारी मां ने भी तो एक से अधिक पुरुष किए थे।

भीम के कान और नहीं सुन सके... यह पापी अपने कर्मों पर लल्जित नहीं होता, उल्टे उनका बखान करता है। उनको अपना गौरव और उपलब्धि मानता है। भीम ने तो सोचा था कि दु:शासन वह सब भुलाना चाहेगा और भीम को उसे स्मरण दिलाना होगा, किंतु यहां तो वही भीम को स्मरण करा रहा है। अब तक तो उसने उनकी पत्नी का ही अपमान किया था, आज वह उनकी मां का भी अपमान कर रहा था।... भीम ने जिह्वा से कुछ नहीं कहा। उसके धनुष से क्षुर छूटने लगे।

पहले ही क्षुर ने दु:शासन का धनुष काट दिया। दूसरे ने उसका ध्वज काटा। तीसरे ने उसके ललाट पर घाव किया और चौथे ने उसके सारथि का मस्तक काटकर भूमि पर गिरा दिया। दु:शासन ने दृष्टि घुमाकर देखा: कौन आ रहा है, उसकी सहायता को?... कौन आता।

निकट तो अनेक लोग थे। किंतु वहीं अर्जुन भी था, कर्ण उसकी ओर पीठ करने का साहस नहीं कर सकता था। कर्ण चाहता भी तो अर्जुन उसे वैसा करने नहीं देता। धृष्टद्युम्न ने दुर्योधन को साध रखा था।युधामन्यु, उत्तमौजा, सात्यकि, नकुल, सहदेव और पांचों द्रौपदेय वहीं थे।

उन सबको कर्ण ने रोक रखा था किंतु अब अर्जुन आ गया था और कर्ण जैसे उसके चंगुल में फंस गया था।... दुर्योधन और कर्ण दु:शासन को देख भर सकते थे, वे न तो उसके लिए रथ ला सकत थे, न सारथि। इस मोटे ने उसके सारथि का वध कर उसे संकट में डाल दिया था।

यह युद्ध तो उसे स्वयं ही लडऩा था।... दु:शासन जैसे किसी उन्माद में अपने आपको भूल गया। उसने दूसरा धनुष उठा लिया और भीम को अपने बाणों से बींध डाला।

नरेंद्र कोहली के प्रसिद्ध उपन्यास से

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