
रघुवीर जैन, सामाजिक कार्यकर्ता
संसदीय लोकतंत्र में विधायी संस्थाओं का अपना महत्त्व होता है। इन संस्थाओं के सदस्यों से आशा की जाती है कि वे यहां जो भी जानकारी देंगे, वह तथ्यपूर्ण होगी। रामगढ़ बांध को लेकर राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत द्वारा विधानसभा में बोले गए झूठ पर प्रवाह स्तंभ में 'पवित्रता भंग' शीर्षक से भुवनेश जैन का आलेख पढ़ा। आश्चर्य है कि राजस्थान के सर्वोच्च सदन में भी जिम्मेदार लोग कितनी बेशर्मी से झूठ बोल जाते हैं। इतना बड़ा झूठ बोलकर भी नेता सीना ताने गर्व से कुर्सी पर चिपके रहते हैं। झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने के बाद भी उन्हें किसी का डर नहीं है।
इस सिलसिले में मुझे एक घटना याद आती है। कुछ वर्ष पहले मैं चितौडग़ढ़ के अरिहंत भवन में प्रात: प्रवचन सुनने जाया करता था। एक दिन प्रवचन में जाते समय देखा कि कुछ लोग झगड़ा कर रहे हैंं। वे घुमन्तु समुदाय के लग रहे थे। शाम को अरिहंत भवन जाते समय भी देखा कि वे वहीं बैठे झगड़ रहे थे। उनमें से एक व्यक्ति मुझे कुछ पढ़ा-लिखा नजर आया। उसे बुलाकर जानकारी ली तो पता चला कि विवाद इस बात को लेकर है कि उनके समाज का एक व्यक्ति समाज की जाजम पर झूठ बोल गया। हमारे समाज का नियम है कि समाज की जाजम पर कोई झूठ नहीं बोल सकता। अब यह व्यक्ति झूठ बोलने के बाद समाज के द्वारा दिए गए दण्ड को भी स्वीकार नहीं कर रहा है।
उसकी बात सुनकर मैं चिन्तन करने लगा कि पिछड़े माने जाने वाले समुदाय में भी ऐसी कठोर सामाजिक व्यवस्था है कि समाज की जाजम पर झूठ बोलने वाले को सहन नहीं किया जाता। वहीं दूसरी ओर हमारे सभ्य कहे जाने वाले समाज में तो लोग थोड़े से स्वार्थवश बड़ा झूठ भी बोल जाते हैं और ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि झूठ बोलने वालों में भय हो। जयपुर के रामगढ़ बांध के संदर्भ में राजस्थान की सबसे बड़ी पवित्र जाजम विधानसभा में एक जिम्मेदार मंत्री द्वारा दिया गया बयान यदि सत्य से परे है तो चिन्तन करना होगा। चिंता की बात है कि नेता झूठ बोलने से जरा भी नहीं हिचकते। हालांकि यह अवमूल्यन सभी वर्गों में दिखाई दे रहा है पर विधायी संस्थाओं की तो पवित्रता बनी रहनी चाहिए। वहां भी यदि इस तरह का अवमूल्यन उभर गया तो फिर शेष बचेगा ही क्या?
Updated on:
19 Jul 2024 08:54 pm
Published on:
19 Jul 2024 08:53 pm
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