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देशहित में एनसीसी को सुदृढ़ बनाए रखिए

आज शिक्षा जगत से जुड़ी कोई कारगर और सराहनीय गतिविधि है तो वह ‘राष्ट्रीय कैडेट कोर’ (एनसीसी) है।
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Sunil Sharma

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Updated: 27 Oct 2017, 2:12 PM IST

NCC

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- कौशल मिश्र, सैन्य व शिक्षा मामलों के जानकार

एनसीसी एक ऐसी राष्ट्रीय संस्था है जो सरकारी और निजी शिक्षा संस्थानों से जुडक़र राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही है। इसका अंशदान समाप्त करने जैसे फैसलों को विशेषज्ञों की नजर से परखना चाहिए, नौकरशाहों के विवेक से नहीं।

आज शिक्षा जगत से जुड़ी कोई कारगर और सराहनीय गतिविधि है तो वह ‘राष्ट्रीय कैडेट कोर’ (एनसीसी) है। युवाओं को देश व समाज के प्रति जागृत, अनुशासित, आत्मविश्वास पैदा करने के लिए यह 1948 से कार्यरत है। इससे खिलवाड़ सिर्फ हमारे लिए ही नहीं, देश के लिए भी भारी पड़ सकता है। वर्ष १९६२ में चीन व १९६५ के पाकिस्तान के हमलों के मद्देनजर इसे देश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में अनिवार्य भी कर दिया गया था ताकि ‘एकता और अनुशासन’ युवाओं का लक्ष्य बन सके।

हम २०२२ तक विश्व में सबसे युवा देश होने का लाभ उठाना चाहते हैं तो हमें एनसीसी के सहयोग से चरित्र निर्माण और आत्मविश्वास को विकसित कर युवाओं को देश के प्रति समर्पित और जागरूक करना होगा। लेकिन, कुछ गलत निर्णय, गलतफहमियां ऐसी परिस्थितियों को जन्म देती हैं जिससे देश और समाज का बड़ा नुकसान हो जाता है। राजस्थान में शायद अधिकारियों की मान्यता है कि जब निजी विद्यालयों और कॉलेजों में सरकारी अनुदान बंद कर दिया गया है तो एनसीसी के लिए दिये जाने वाले अनुदान भी बंद कर देने चाहिए। राज्य सरकार द्वारा अनुदान किसी निजी विद्यालय और कॉलेज को नहीं एनसीसी को दिया जाता रहा है।

एनसीसी पर होने वाले खर्च का २५ प्रतिशत राज्य सरकार और ७५ प्रतिशत अंशदान केंद्र वहन करता है। लेकिन, राजस्थान सरकार ने अब अपने उत्तरदायित्व से आंखें फेर ली हैं। इस निर्णय से निजी स्कूलों और कॉलेजों के एनसीसी कैडेट प्रभावित हो रहे हैं। जयपुर , कोटा , उदयपुर , जोधपुर इन चार एनसीसी ग्रुपों को लिया जाए तो इनमें २ लाख से ऊपर एनसीसी कैडेट हैं जिनमें से ८० प्रतिशत कैडेट निजी विद्यालयों और कॉलेजों के हैं। अधिकतर कैडेट यूनिफॉर्म, खाने-पीने और आने-जाने का खर्च उठाने में समर्थ नहीं है।

इधर केंद्र सरकार भी अपना ७५ प्रतिशत अंशदान भी राज्य सरकार द्वारा अंशदान न देने से बंद कर कर सकती है। हमने सरकारी और निजी संस्थाओं में एनसीसी को अलग-अलग मापदण्डों में रखा है तो यह हमारी भारी भूल ही है और एनसीसी कैडेट्स के साथ न्याय नहीं है। एनसीसी एक राष्ट्रीय संस्था है जो सरकारी और निजी शिक्षा संस्थानों से जुडक़र राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही है। अंशदान समाप्त करने जैसे फैसलों को विशेषज्ञों नजर से परखना चाहिए। इसे केवल नौकरशाहों के विवेक पर छोडऩा ठीक नहीं है। एनसीसी को कमजोर करने वाला कोई भी निर्णय, राज्य और देश को कमजोर करेगा इसलिए ऐसे निर्णय पर पुनर्विचार की जरूरत है।