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समझनी होगी जल संसाधन प्रबंधन की उपयोगिता

वैसे तो जलवायु परिवर्तन का व्यापक प्रभाव है, लेकिन जल प्रबंधन भी इससे जुड़ा एक पहलू है। गत माह के आखिर में गुजरात के गांधीनगर में जी-२० के पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह की दूसरी बैठक हुई। इस बैठक में भी इस बात पर जोर दिया गया कि भारत अपने अनुभवों, और प्रौद्योगिकी के जरिए जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जी-20 सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने को प्रतिबद्ध है।

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Patrika Desk

Apr 14, 2023

समझनी होगी जल संसाधन प्रबंधन की उपयोगिता

समझनी होगी जल संसाधन प्रबंधन की उपयोगिता

गजेन्द्र सिंह
शेखावत
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री

जलवायु परिवर्तन के खतरों से सब परिचित हैं। वैश्विक मंचों पर इसको लेकर लगातार चर्चा भी होती रहती है। समय-समय पर यह बात भी सामने आती है कि संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों को बढ़ाने का काम किया है। एक आर्थिक सिद्धांत है 'ट्रेजेडी ऑफ द कॉमन्स '। यह कहता है कि जब किसी संसाधन तक लोगों की पहुंच आसान पहुंच होती है, तो वे इसका दुरुपयोग करने लगते हैं। पृथ्वी हमारा साझा संसाधन है और इसी मानवीय प्रवृत्ति ने हमें जलवायु परिवर्तन के ज्ञात खतरों की ओर धकेला है। ऐसे में एक चर्चित अवधारणा बनने लग गई है और वह है पर्यावरण के लिए जीवन शैली। इस जीवन शैली के केन्द्र में जल है।
पिछले साल एक दिसम्बर को जब भारत ने जी-20 की अध्यक्षता संभाली तो उसने 'वसुधैव कुटुंबकम ' के आदर्श वाक्य के साथ 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य ' का दृष्टिकोण दुनिया के साथ साझा किया। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि यदि दुनिया को जलवायु परिवर्तन के खतरों का मुकाबला करना है, तो जी-२० से जुड़े देशों को ज्यादा प्रयास करने होंगे, क्योंकि दुनिया का अस्सी फीसदी उत्सर्जन इन देशों की वजह से ही होता है। वैसे तो जलवायु परिवर्तन का व्यापक प्रभाव है, लेकिन जल प्रबंधन भी इससे जुड़ा एक पहलू है। गत माह के आखिर में गुजरात के गांधीनगर में जी-२० के पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह की दूसरी बैठक हुई। इस बैठक में भी इस बात पर जोर दिया गया कि भारत अपने अनुभवों, और प्रौद्योगिकी के जरिए जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जी-20 सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने को प्रतिबद्ध है। भारत का यह भी मानना है कि जल हमारे विकास प्रतिमान के केंद्र में ऐसी साझेदारियों के साथ होना चाहिए, जो जल को हर किसी का कल बनाने में सहयोग करे। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से आयोजित दूसरी पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह (ईसीएसडब्ल्यूजी) की बैठक में जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल संसाधन प्रबंधन पर प्रस्तुति दी गई। भारत ने फिर से इस बात को दोहराया कि उसकी प्राथमिकताएं, नीति और कार्य निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने को संकल्पित है। जल संसाधनों का एकीकृत और सतत उपयोग कैसे हो? पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन व जल निकाय पुनरुद्धार तथा नदी संरक्षण व वर्षा जल प्रबंधन से जुड़े विषय सदस्य देशों से साझा किए गए। जहां तक केन्द्र सरकार के प्रयासों की बात है, देश के 1.4 बिलियन लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक प्रयास किए गए हैं। यह पहली बार हुआ जब देश में जल प्रबंधन के काम में तालमेल रखने के लिए एकीकृत जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया। दुनिया के सबसे बड़े पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम जलजीवन मिशन के जरिए आज 116 मिलियन से अधिक, यानी 60 फीसदी घरों में नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। ताजा अध्ययन यह भी बताता है कि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से पांच वर्ष से कम आयु के 1.36 लाख बच्चों का जीवन बचाया जा सकता है। स्वच्छ भारत अभियान को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का एक अध्ययन बताता है कि इस अभियान के कारण 3 लाख बच्चों के जीवन को बचाने में सफलता मिली।
बैठक में देश में साझा किए गए जल प्रबंधन के प्रमुख कार्यकलापों को दिखाया गया था। इनमें नमामि गंगा मिशन का उल्लेख करना जरूरी है। जल प्रदूषण का प्रबंधन, नदी को निरंतर प्रवाह में बनाए रखने व नदी पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण तो अहम है ही, इस बात का भी प्रयास लगातार किया जा रहा है कि लोगों की आजीविका टिकाऊ रहे। जी-20 की बैठक में, जल संसाधन प्रबंधन के सभी स्तरों पर सहयोग की भूमिका पर जोर दिया गया। पानी और भूजल की सामान्य समझ और सतत विकास के सिद्धांतों को एकीकृत करना भी अहम काम है। जी-20 के प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात की प्राचीन बावड़ी व साबरमती साइफन संरचना का अवलोकन भी किया। इस तरह की बैठकें जल प्रबंधन क्षेत्र में स्थायी और सुनिश्चित भविष्य की दिशा में अहम कदम है।