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खड़ा हो जल आंदोलन

नए जल शक्ति मंत्री गिरते भू-जल को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें इसके लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करना होगा।

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Water crisis in India

Water crisis in India

देश का कोई भी मंत्री क्यों ना हो, गंभीर समस्या पर चिंता जताने से नहीं चूकता। समस्या का समाधान निकले या नहीं, लेकिन अधिकारियों के समक्ष चिंता जताना नहीं भूलता। नए जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जयपुर दौरे पर आए तो गिरते भू-जल स्तर को लेकर चिंतित नजर आए। ठीक वैसे ही, जैसे उनसे पहले जल संसाधन संभालने वाले मंत्री नजर आते थे। बीते तीन-चार दशक के हालात पर नजर डाल ली जाए तो साफ हो जाता है कि गिरते भू-जल को लेकर चिंता जितनी गहरी होती गई है, भू-जल स्तर उतना ही नीचे जाता रहा है। कारण साफ है कि चिंता जताने को लेकर जितनी गंभीरता जताई जाती है उसके समाधान के लिए उतने प्रयास होते नहीं दिखाई देते। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी बनाने पर चर्चा तो खूब होती है, लेकिन जमी नी हालात किसी से छिपे नहीं हैं। अदालतों के तमाम निर्देशों के बावजूद क्या हुआ? निजी भवनों की बात तो दूर, सरकारी भवनों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम प्रभावी ढंग से काम नहीं करते। नीति आयोग की रिपोर्ट को आधार माना जाए तो देश में आज करोड़ों लोग साफ पानी को तरस रहे हैं।

देश में पीने का 85 फीसदी पानी भू-जल स्रोतों पर निर्भर है। बांधों के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण के चलते पानी आना बंद हो रहा है। नदियों को जोडऩे की योजना राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रही है। भू-जल को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रबंधन की जरूरत है। सब जानते हैं कि 'जल है तो कल है।Ó लेकिन क्या महज इस नारे को सरकारी होर्डिंग्स में लगाने या विज्ञापन देने भर से इसका उद्देश्य पूरा हो जाएगा? जब तक सरकार, गैर सरकारी संगठन और आमजन अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सरकारी बैठकें रस्म अदायगी से ऊपर नहीं उठ पाएंगी। जरूरत पानी को लेकर राष्ट्रीय चेतना जगाने की है। पानी बचाने के अभियान को जन-जन का अभियान बनाने की है। बीते चार साल में स्वच्छता को लेकर जैसा माहौल बना, क्या वैसा पानी बचाने को लेकर नहीं बन सकता?

नए जल शक्ति मंत्री गिरते भू-जल को लेकर चिंतित हैं तो उन्हें इसके लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करना होगा। लापरवाह अफसरों को सजा दिलानी होगी तो अच्छा काम करने वालों को पुरस्कृत भी करना होगा। जल संकट आज देश का सबसे बड़ा संकट है। हर साल खरबों रुपए बाढ़ या सूखे से निपटने में खर्च होते हैं, क्यों नहीं बाढ़ के पानी का सदुपयोग करने की तकनीक विकसित की जाए। हर साल हर राज्य सरकार के मंत्री-नेता पानी बचाने की तकनीक सीखने इजरायल जाते हैं, लेकिन उसके परिणाम कहीं देखने को नहीं मिले। मंत्री को अधिकारियों को निर्देश देने पड़ें, इसका अर्थ अधिकारी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहा। जल हमारा जीवन है। जीवन के साथ खिलवाड़ करने का हक किसी को नहीं मिलना चाहिए।