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Patrika Opinion: मौजूदा राजनीतिक हालात में सबको साधने का प्रयास

वित्त मंत्री ने सबकी झोली में कुछ न कुछ डालने की कोशिश की है। भारत युवाओं का देश है। लिहाजा रोजगार के नए अवसर सृजित करने का संकेत भी बजट में रहा है। युवाओं को इंटर्नशिप देने के अलावा उन्हें प्रशिक्षित करने एवं कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

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जयपुर

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Nitin Kumar

Jul 23, 2024

मोदी 3.0 सरकार का पहला बजट युवाओं और अपनों को साधने पर तो केन्द्रित रहा ही है, इसका फोकस अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर भी है। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह बजट पेश किया तो हर वर्ग की अपनी-अपनी उम्मीदें थीं। युवा हो या किसान, कर्मचारी हों या फिर महिलाएं, उद्योगपति हों या शेयर बाजार से जुड़े लोग, वित्त मंत्री ने सबकी झोली में कुछ न कुछ डालने की कोशिश की है। भारत युवाओं का देश है। लिहाजा रोजगार के नए अवसर सृजित करने का संकेत भी बजट में रहा है। युवाओं को इंटर्नशिप देने के अलावा उन्हें प्रशिक्षित करने एवं कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई है। शिक्षा बजट में बढ़ोतरी को भी युवाओं को प्राथमिकता में रखने का ही इशारा है।

वित्त मंत्री के इस बजट में लोकसभा चुनाव में बहुमत से दूर रहने वाली भाजपा ने आंध्र प्रदेश और बिहार के अपने बड़े सहयोगियों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इन दोनों राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देने के बजाए सडक़ और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़ी राशि आवंटित की गई है। नौकरीपेशा वर्ग के लिए आयकर में मामूली राहत तो दी गई है, पर ८० सीसी में छूट की सीमा नहीं बढ़ाई गई। केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग की घोषणा भी नहीं हुई। बजट घोषणाओं के मुताबिक, कैंसर की दवाइयां, मोबाइल, एक्सरे मशीन, सोना-चांदी के गहने सस्ते हुए हैं। कृषि बजट में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाली कोई बड़ी घोषणा नजर नहीं आई। न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर बजट में कुछ भी नहीं कहा गया। सौर ऊर्जा को बढ़ावा देेने की बात ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक कदम माना जा सकता है। बजट की भाजपा के दोनों बड़े सहयोगियों ने प्रशंसा की है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू बजट से खुश नजर आए तो विपक्ष ने इसे ‘कुर्सी बचाओ बजट’ बताया है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का तो यहां तक कहना है कि बजट ने कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र को कॉपी किया है। जाहिर है कि कांग्रेस का इशारा बजट में घोषित इंटर्नशिप कार्यक्रम की ओर है।

वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही गई है। इससे यह भी साफ होता है कि कोई भी दल आधी आबादी की उपेक्षा करने की बात सोच भी नहीं सकता। यह बात भी सच है कि बजट चाहे केन्द्र का हो या फिर राज्यों का, हर वर्ग की उम्मीदों पर खरा उतरे यह संभव नहीं होता। लेकिन यह बजट युवाओं और मध्यम वर्ग को राहत देने वाला कहा जाएगा। कह सकते हैं कि मौजूदा राजनीतिक हालात में यह बजट सबको साधने वाला बजट है।