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patrika opinion मौसम चक्र में बदलाव से नित नई आपदाओं के खतरे

यह सही है कि गर्मी ने अचानक ही रौद्र रूप नहीं लिया है। पावर प्लांट, ऑटोमोबाइल, वनों की कटाई और अन्य स्रोतों से होने वाला ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन पृथ्वी को अपेक्षाकृत काफी तेजी से गर्म कर रहा है। इससे वैश्विक औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है।

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जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में मौसम चक्र गड़बड़ा रहा है। तापमान बढऩे के पुराने आंकड़े पीछे छूटते जा रहे हैं। भीषण गर्मी का यह दौर इसलिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि इससे लोगों की जान पर बन आई है। मक्का में हज के लिए गए यात्रियों की मौत को लेकर सामने आया ताजा आंकड़ा बताता है कि बढ़ते तापमान और इससे होने वाले वैश्विक संकट के मुकाबले की दिशा में अभी समुचित प्रयास नहीं हो पाए हैं। न ही विभिन्न देशों की सरकारें वैज्ञानिकों की ओर से जारी चेतावनियों को लेकर ज्यादा गंभीर नजर आ रहीं।
गर्मी से होने वाली मौतों की खबर उन सब देशों से आ रही है, जहां जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम चक्र ने भी करवट बदली है। होने यह लगा है कि गर्मी के मौसम में तेज गर्मी और सर्दी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लोगों को शायद यह लगता है कि भीषण गर्मी का यह दौर भी मौसम चक्र का हिस्सा है और कुछ समय बाद इसकी तीव्रता अपने आप कम हो जाएगी। लेकिन, राहत मिलने की जगह हालात विकट हो रहे हैं। मौसम में यह बदलाव आपदा में बदल रहा है। यही कारण है कि तापमान की मार से लोगों की जान तक जा रही है। बड़ी संख्या में हज यात्रियों की मौतें भी इसी बात की तरफ इशारा कर रही हैं कि सऊदी अरब सरकार ने भीषण गर्मी से हज यात्रियों को बचाने के पर्याप्त उपाय नहीं किए। साथ ही हज यात्रियों ने भी गर्मी के तेवर को गंभीरता से नहीं लिया। इन दिनों भारत के विभिन्न हिस्से भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं। इसकी वजह से मौतों के मामले भी सामने आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार और उत्तरप्रदेश में गर्मी के कारण २५ मतदान कर्मियों की मौत ने भी गर्मी की भीषणता का उजागर किया था।
यह सही है कि गर्मी ने अचानक ही रौद्र रूप नहीं लिया है। पावर प्लांट, ऑटोमोबाइल, वनों की कटाई और अन्य स्रोतों से होने वाला ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन पृथ्वी को अपेक्षाकृत काफी तेजी से गर्म कर रहा है। इससे वैश्विक औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। समुद्री स्तर के साथ तूफान की तीव्रता में भी वृद्धि हो रही है। बार-बार कहा जा रहा है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया और इसे कम करने के प्रयास नहीं किए गए तो हालात लगातार गंभीर होते जाएंगे। गर्मी की भयावहता और उससे हो रही मौतों से सभी देशों को सबक लेना चाहिए और गर्मी से बचाव के उपाय करने के साथ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के लिए ठोस कदम उठाने पर ध्यान देना चाहिए।