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patrika opinion आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने का समय

जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और निर्वाचित सरकार के सत्ता में आने के बाद यह तो निर्विवादित है कि जनता ने आतंकियों को खारिज कर दिया है। अब वहां की जनता देश के अन्य इलाकों की तरह शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहती है। आम जनता का यह निर्णय आतंकियों को रास नहीं आया है। शायद […]

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जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और निर्वाचित सरकार के सत्ता में आने के बाद यह तो निर्विवादित है कि जनता ने आतंकियों को खारिज कर दिया है। अब वहां की जनता देश के अन्य इलाकों की तरह शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहती है। आम जनता का यह निर्णय आतंकियों को रास नहीं आया है। शायद यही वजह है कि आतंकी आम जनता में फिर से अपना खौफ कायम करना चाहते हैं। इसी कड़ी में आतंकियों ने गांदरबल जिले में सुरंग निर्माण का काम करने वालों पर हमला कर के छह श्रमिकों और एक डॉक्टर की हत्या कर दी। 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नई गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद यह दूसरा आतंकी हमला है।

गांदरबल में हुआ आतंकी हमला, नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के दूसरे दिन 9 जून को जम्मू क्षेत्र के रियासी जिले में तीर्थयात्रियों की बस पर गोलीबारी की याद दिला देता है। उस दिन हुए हमले में सात तीर्थयात्री, ड्राइवर और कंडक्टर की मौत हो गई थी, जबकि कई तीर्थयात्री घायल हो गए थे। आतंकी, सेना जैसी वर्दी में आए थे और उन्होंने पांच मिनट तक गोलियां बरसाई थीं। साफ है कि आतंकियों को न तो लोकसभा चुनाव में जनता की भागीदारी पसंद आई और न ही विधानसभा चुनाव में। जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुडऩा आतंकियों को इसलिए भी नागवार गुजर रहा है, क्योंकि इससे उनकी जनता पर पकड़ कमजोर हो जाएगी और क्षेत्र में अशांति बनाए रखने का उनका मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। असल में जम्मू-कश्मीर में आतंक के लिए पाकिस्तान सीधे तौर पर जिम्मेदार है। भारत इसके लिए पाकिस्तान को समय-समय पर चेतावनी भी देता रहता है, लेकिन उस पर इसका खास असर नहीं पड़ता।

इस्लामाबाद में हाल ही संपन्न शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट संदेश दिया था कि आतंकवाद को राज्य की नीति बनाने से क्षेत्र में आपसी सहयोग बढऩे की संभावना नहीं है। विदेश मंत्री जयशंकर की इस्लामाबाद की यात्रा के दौरान पाकिस्तान के तेवर कुछ नरम नजर आए थे, लेकिन जिस तरह से आतंकियों ने अपने हमले तेज किए हैं, उससे साफ है कि पाकिस्तान बदलने वाला नहीं है। इसलिए सावधान रहना होगा और आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने की रणनीति पर ध्यान देना होगा। सर्दियों के मौसम में आतंकियों की घुसपैठ और हमलों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सीमा पर ज्यादा चौकसी आवश्यक हो गई है। क्षेत्र के ऐसे लोगों की पहचान भी आवश्यक है, जो आतंकियों की मदद कर रहे हैं।