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बिहार: शहाबुद्दीन के ‘गढ़’ से लालू के ‘घर’ तक गरमा रही है सारण मंडल की सियासत

-एंटी-इन्कम्बेंसी बढ़ा रही धडक़नें-अहम होगा सारण में टिकट बंटवारा-चर्चा में तेज प्रताप का तलाकनामा

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बिहार: शहाबुद्दीन के ‘गढ़’ से लालू के ‘घर’ तक गरमा रही है सारण मंडल की सियासत

आवेश तिवारी, सिवान से

यूपी की सीमा पारकर जब आप बिहार की सीमा में प्रवेश करते हैं तो सडक़ों की चमक देखकर आंखें चौंधिया जाती हैं, लेकिन जब आप गोपालगंज से आगे सिवान जिले की ओर बढ़ते हैं, भरम टूटने लगते हैं। रात के दस बजे हैं और रेलवे स्टेशन को छोड़ समूचे सिवान में मरघट-सा सन्नाटा है। भारी कदमों और थकी हुई आवाज में रिक्शा चालक कहता है, ‘अब तो ठीक है साहब, शहाबुद्दीन रहे तो शाम छह बजे बाजार बंद हो जाता था।’ बिहार की राजनीति को समझने का सबसे बेहतर तरीका है सारण प्रमंडल की सिवान, गोपालगंज, सारण व महाराजगंज की लोकसभा सीटों की राजनीति समझना। यहां बाहुबल, जातिवाद, अवसरवाद, परिवारवाद, सांप्रदायिकता सब कुछ है, लेकिन इसमें बिहार के गरीब किसानों की कराहें भी शामिल हैं जो कभी सिंचाई के पानी के लिए चीखता है तो कभी खाद के लिए। इसमें अक्सर दंगों में होने वाली मौतें भी शामिल हैं और लगातार गहराता पलायन भी।

सिवान से लेकर छपरा (सारण जिले का मुख्यालय) तक आम जनता फिलहाल हुक्मरानों से नाराज है। गठबंधन की राजनीति नए समीकरणों को जन्म दे रही है। मौजूदा सांसदों को भी नहीं पता है कि उनकी सीट रहेगी या गठबंधन में सीटों का बंटवारा उनकी किस्मत को अंधेरे में झोंक देगा। इन सभी सीटों पर एंटी-इन्कम्बेंसी उनकी धडक़नें बढ़ा रही है। टिकट के दावेदार दिल थाम कर बैठे हैं। सिवान शहर के हसैबल्लाह कहते हैं कि राज्य में कोई भी गठबंधन बन जाए, सिवान में मुकाबला जेल में होने के बावजूद शहाबुद्दीन बनाम अन्य ही होगा। वहीं छपरा की नफीसा कहती हैं कि सारण का टिकट लालू परिवार के बीच दीवारें खड़ी कर देगा।

राजद के लिए मजबूरी का नाम है सिवान: यह बात अजीबोगरीब है लेकिन सच कि बिहार की जनता जिससे नफरत करती है उससे मोहब्बत भी करती है। सिवान की राजनीति को समझने-बूझने वाले अरुण मिश्र कहते हैं कि आज सिवान में जो कुछ भी है, शहाबुद्दीन की देन है, फिर चाहे दहशत ही क्यों न हो। भाजपा के मौजूदा सांसद ओमप्रकाश यादव की छवि आम जनता के बीच खराब होती जा रही है। सबकी शिकायत है कि उन्होंने सिवान के लिए कुछ नहीं किया। पनवाड़ी लक्ष्मण प्रसाद कहते हैं कि सिवान अब भयमुक्त हो चुका है लेकिन अपराध आज भी हो रहे हैं, हत्याएं आज भी हो रही हैं, सांप्रदायिक दंगे आज भी हो रहे हैं। अरविंद बताते हैं छठ पूजा के दौरान कोईराइगांवा करबला में दंगा भडक़ गया था, कई दुकानें जला दी गईं।

शहाबुद्दीन के जेल जाने के बाद से राजद ने शहाबुद्दीन की पत्नी हिना साहेब को ही सिवान से दो बार टिकट दिया, लेकिन वह दोनों बार चुनाव हार गईं। रघुनाथ झा और साधु यादव को याद करता है गोपालगंज: लालू प्रसाद यादव के गृह जिले गोपालगंज में जनता आज भी पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रघुनाथ झा और लालू प्रसाद यादव के ***** साधु यादव को याद करती है। गोपालगंज के सोनू दूबे कहते हैं कि जो भी विकास हुआ या तो झा साहब ने किया या साधु ने। अफसोस कि रेल मंत्री होने के बावजूद लालू प्रसाद यादव गोपालगंज को रेल मार्ग से पूरी तरह से जोड़ न सके। गोपालगंज के छात्र निर्भय कहते हैं यह काम मोदी जी को करना था।

गोपालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के जनक राम को इस बार टिकट मिलना मुश्किल लग रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सुशील मोदी की उनसे नाराजगी की खबरें लगातार आ रही है, वहीं उन पर जनता की उपेक्षा का भी आरोप लग रहा है। इस बात की तस्दीक उनकी पार्टी के लोग भी कर रहे हैं। खबर यह भी है कि हाल ही में एनडीए छोडक़र यूपीए में शामिल हुए उपेन्द्र कुशवाहा गोपालगंज सीट से अपना उम्मीदवार उतारेंगे। गोपालगंज से ही जद यूके बाहुबली सतीश पांडे विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव में भी अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे। फिलहाल गोपालगंज में विधायक पद से लेकर जिला परिषद अध्यक्ष पद पर इनके ही लोग बताए जाते हैं।

ऐश्वर्या और तेज प्रताप की जंग की गवाह सारण सीट: सिवान से पटना तक ट्रेन में यात्रा के दौरान छपरा के लिए सैकड़ों यात्री चढ़ते हैं। आजकल अगर कुछ चर्चा में है तो तेजप्रताप का तलाकनामा और ऐश्वर्या की जिद। छपरा के नागेन्द्र राय कहते हैं कि सारण सीट (सीमांकन से पहले छपरा) पर 40 साल से लालू की पार्टी का ही वर्चस्व रहा है, हालांकि पिछले चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से हार गई थीं। अब जनता और लालू परिवार चाहते हैं कि ऐश्वर्या या उनके पिता यहां से चुनाव लड़ें, पर तेज प्रताप नहीं चाहते। सारण मंडल की सीटों में महाराजगंज सीट का अपना जलवा है। चर्चा है, यदि सिवान सीट भाजपा को मिली, तो महाराजगंज जदयू के खाते में जाएगी।

बंद कारखाने, सूखी नदियां और बेबस किसान

सिवान से 10 किमी दूर पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के गांव जिरादेई जाते वक्त रास्ते में सूती कारखाने की खंडहर बनी इमारत नजर आई। एक वक्त इस कारखाने से करीब 5 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और करीब 5 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता था, लेकिन लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में भारी घाटा दिखाकर इसे बंद कर दिया गया। कर्मचारी आज भी रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पचखरी के अभिमन्यु सिंह कहते हैं कि 1980 से पहले एक वक्त था जब समूचे सिवान और गोपालगंज में प्रति हेक्टेयर करीब पांच सौ क्विंटल गन्ना होता था। यह किसानों के लिए नकदी फसल थी। लेकिन आज किसान डरता है क्योंकि सिवान में तीनों चीनी मिल बंद हो चुकी हैं। हर बार चुनाव से पहले बंद चीनी मिल व सूत फैक्ट्री फिर शुरू कराने का वादा किया जाता है। सिवान में दहा नदी है लेकिन उसमें पानी कभी नहीं रहता। अमीर किसान पंपिंग सेट लगा लेते हैं, गरीब आसमान ताकता रहता है।