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राष्ट्रगान के प्रति सम्मान जरूरी लेकिन…

संविधान के मौलिक कर्तव्यों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान आदि का सम्मान करने को भारतीय नागरिक का पहला मूल कर्तव्य बताया गया है
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Sunil Sharma

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Updated: 25 Oct 2017, 3:49 PM IST

national flag

national flag of india

- सुभाष कश्यप, संविधान विशेषज्ञ

संविधान के मौलिक कर्तव्यों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान आदि का सम्मान करने को भारतीय नागरिक का पहला मूल कर्तव्य बताया गया है। लेकिन अहम सवाल यही है कि क्या इसे जबरन थोपा जाना चाहिए?

क्या राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने वाले ही सच्चे देशभक्त हैं? सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में लम्बे समय से याचिका विचाराधीन है। हालांकि यह भी सच है कि संविधान के मौलिक कर्तव्यों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान आदि का सम्मान करने को भारतीय नागरिक का पहला मूल कर्तव्य बताया गया है। लेकिन अहम सवाल यही है कि क्या इसे जबरन थोपा जाना चाहिए? इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि देश में मौजूद कई राजनीतिक दल अपने निजी स्वार्थों के चलते राष्ट्रभक्ति की आड़ में अपनी मनमर्जी जनता पर थोपते रहे हैं।

ऐसे दलों के कार्यकर्ता राष्ट्र के सच्चे सपूत होने का दावा करते हुए हर किसी को राष्ट्रभक्ति का सबक सिखाने को तत्पर रहते हैं। फिर चाहे कोई पैरों से अशक्त व्यक्ति सिनेमा घर में राष्ट्रगान के समय खड़े होने में असमर्थ ही क्यों न हो। ये लोग उसे भी अपने तरीके से राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाने से नहीं चूकते। आखिर राष्ट्रभक्ति का पैमाना क्या हो और कौन इसे तय करे। अदालत, सरकार, राजनीतिक दल या फिर स्वयं नागरिक। क्या सिर्फ राष्ट्रगान के दौरान खड़े होकर ही राष्ट्रभक्ति दर्शायी जा सकती है या फिर जो नागरिक ईमानदारी से अपना कर्तव्य पूरा कर, देश और समाज की सेवा कर रहा है वह सच्चा राष्ट्रभक्त है।

गौरतलब है कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को सही माना था। हालांकि इस निर्णय के कुछ समय बाद ही केरल सिनेमा सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट को अपना आदेश वापस लेने की मांग की। इस याचिका में सिनेमा घर को मनोरंजन की जगह बताते हुए राष्ट्रगान का विरोध किया गया। यह भी देखना होगा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान फिल्म शुरू होने से पहले बजाया जाता है। फिल्म शुरू होने से पहले दर्शकों का सिनेमाघरों में आना जारी रहता है और इस दौरान वे अंधेरे में बैठने के लिए अपनी कुर्सियां तलाशते रहते हैं। ऐसे में राष्ट्रगान बजता है तो वे हड़बड़ी के कारण राष्ट्रगान को उचित सम्मान देने की स्थिति में नहीं होते। तो ऐसे में क्या उन्हें राष्ट्रद्रोही करार दिया जा सकता है।

कोई व्यक्ति किसी कारणवश इस दौरान अपना सम्मान प्रकट करने में असमर्थ है तो उसकी परिस्थिति पर भी गौर करना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि राष्ट्रगान का सम्मान होना चाहिए, इसे देश के सभी नागरिकों को करना चाहिए। यह उनका अपने देश के प्रति पहला फर्ज है। लेकिन इसके सम्मान को लेकर मॉरल पुलिसिंग का मध्ययुगीन तरीका किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।