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जीव क्रूरता, अंधविश्वास और ठगी

जातक कथाओं में सियार को बुद्धिमान प्राणी के रूप में दर्शाया गया है। इनकी संख्या में कमी का असली कारण उनके सिर की वह काल्पनिक हड्डी है, जिसे कुछ लोग सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं।
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Sunil Sharma

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Updated: 15 Jun 2018, 9:29 AM IST

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- मेनका गांधी, पशु कल्याण कार्यकर्ता

धर्म के नाम पर कैसे-कैसे अंधविश्वास फल-फूल रहे हैं। यह जानने के लिए पीपुल फॉर एनिमल्स की टीम ने पिछले कुछ समय के दौरान इंटरनेट पर तमाम संबंधित वेबसाइटों की पड़ताल की। जब से मुझे हत्थाजोड़ी के ‘जादुई तिलिस्म’ के बारे में इसे बेचने वाली वेबसाइटों के माध्यम से पता चला, तब से ही हम ऐसी तमाम चीजों की जांच कर रहे हैं। हत्थाजोड़ी एक विशाल मॉनिटर छिपकली का गुप्तांग होता है। इसे बेचने वाली वेबसाइटों का दावा है कि इससे स्वास्थ्य समृद्धि और आकर्षण-बल पैदा होता है।

इसी तरह सियार सिंघी नाम की एक जड़ी है। यह सियार के कथित सींग से बनती है। पहली बात यह कि वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 के तहत सियारों के शिकार पर रोक है। दूसरी बात, सियारों के कोई सींग नहीं होता। अंधविश्वास को बढ़ावा देकर लोगों को ठगने वाले कहते हैं कि जब सियार सिर नीचे की ओर कर के हुआं-हुआं करता है (जो कि तकनीकी रूप से नामुमकिन है) तब अचानक उसके सिर पर सींग उभर आता है। यदि सियार को मारकर उसका सींग उससे जुड़े बालों सहित निकाल लिया जाए और इसे सिंदूर में रख दिया जाए, तो इससे जुड़े बाल हमेशा बढ़ते रहेंगे और विविध रंगों के होंगे। इससे बुरी रूहें दूर रह सकती हैं यदि आप इसके इर्द-गिर्द हवन करते हैं। हवन के लिए कर्मकाण्ड में निपुण व्यक्ति और पैसों की जरूरत होगी। इसके बगैर यह कारगर ही नहीं होगा (जिसका दोष जाहिर तौर से आप पर ही जाएगा)।

सियार सिंघी से जुड़ी यह बकवास हर वर्ग-समाज में फैली है। श्रीलंका में कुछ अनपढ़ लोग जुए की बाजी जीतने के लिए इसके ताबीज का इस्तेमाल करते हैं। नेपाल और भारत में एक जनजाति के लोग मानते हैं कि पुरुषों के भीतर इससे अंधेरे में देखने और औरतों को आकर्षित करने की क्षमता पैदा होती है। बंगाल में लोग इसे तिजोरियों के भीतर रखते हैं (हत्थाजोड़ी को भी तिजोरी में रखा जाता है) ताकि उनकी धन-संपदा बढ़े। पूर्व-शर्त यह है कि तिजोरी की पूजा की गई हो। आम तौर से जो लोग पूजा करवाते हैं, बाद में तिजोरी लूट ले जाते हैं। कुछ वेबसाइटों पर तो यहां तक बताया गया है कि एक धर्मग्रंथ के अनुसार सियार शैतान की मां है इसलिए उसके सींग को पास रखने से शैतान दूर रहता है।

गोल्डन जैकॉल यानी सियार की 13 उपप्रजातियां होती हैं। अब कुल सात बची हैं। यह कुत्ते जैसा छोटे कद का जानवर होता है जो फल, कीड़े, छोटे सरीसृप, पक्षी और चूहे आदि खाकर जीता है। ये आम तौर से पारिवारिक झुंड में पाए जाते हैं। जातक कथाओं में सियार को बुद्धिमान प्राणी के रूप में दर्शाया गया है। इनकी संख्या में कमी का असली कारण उनके सिर पर उग आने वाली वह काल्पनिक हड्डी है, जिसे कुछ लोग सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं।

इसका प्रचार करने वाली वेबसाइटों के मुताबिक, शास्त्रों में अस्वच्छ बताई गई सियार के सींग की हड्डी समृद्धि लाती है, कानूनी मुकदमे जीतने में मदद करती है, विवाहित जोड़ी को बनाए रखती है, स्वास्थ्य सुनिश्चित करती है, जमीन-जायदाद लाती है और अवसाद दूर करती है। यदि इस हड्डी को ‘जागृत’ कर दिया गया (इसका अर्थ है लाखों की लागत से की जाने वाली पूजा-अर्चना आदि) तो इससे ऑटिज्म, मानसिक रोग, पैनिक डिसऑर्डर, एकाग्रता की समस्या, अतिसक्रियता, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी), खाने-पीने से जुड़ी गड़बडिय़ां, स्किट्सफ्रीनिया, मादक पदार्थों की लत इत्यादि दूर हो सकते हैं। ये वेबसाइट पुलिस की नजर में हैं और इनके संचालकों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अलग-अलग वेबसाइट पर धर्म के मुताबिक विविध मंत्र भी दिए गए हैं। इन मंत्रों का कोई अर्थ नहीं है, पर वेबसाइटों के मुताबिक आपको ये मंत्र 21 से 108 बार बांचने होते हैं। इतना करने के बावजूद मंत्र तब तक कारगर नहीं होगा, जब तक कि वेबसाइट से एक माणिक की माला न खरीद ली जाए। इसके लिए ग्राहक से नियमित शुल्क लिया जाता है और लागत बढ़ती ही जाती है।

जड़ी को और महंगा बनाने के लिए अजीब किस्म के विवरण जोड़े गए हैं। जैसे, सियार महज सियार नहीं होता बल्कि एक दुर्लभ प्रजाति है जिसे मोतिया कहते हैं, यह ऐसा वैसा मोतिया नहीं बल्कि झुंड का नेता होता है इत्यादि। सवाल उठता है कि वेबसाइट संचालकों को कैसे पता कि अमुक सियार झुंड का नेता है और उसके सिर पर सींग है। तो अजीबगरीब किस्से और भी हैं। सियार सींग से शायद लोग कम मूर्ख बन पा रहे थे कि अब बाजार में सियार के गुप्तांग से पैदा होने वाली नई चीज बाजार में लाई गई है, जिसे पवित्र वस्तु के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।

हर वेबसाइट का दावा है कि सियार सिंघी बेचने वाली दूसरी वेबसाइटें या दुकानें फर्जी हैं। यदि 21वीं सदी में आपको लगता है कि किसी जीव-जंतु की हड्डी या बाल के रेशे के सहारे आप वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं जो आपको मेहनत, प्रार्थना, शिक्षा और महत्त्वाकांक्षा से नहीं हासिल, तो इन फर्जी वेबसाइटों के मालिकों की जेब भरने के लिए आप स्वतंत्र हैं।