
fake baba
- आभा सिंह, विधि विशेषज्ञ
आश्चर्य की बात है कि सिर्फ गरीब, अनपढ़ लोग ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे ढोंगी बाबाओं की बातों को सुनते हैं। आखिर कब हमारी आंखें खुलेंगी और कब समझेंगे कि अंधविश्वास के कारण ही बाबाओं का कारोबार बढ़ता है
हाल ही में बाबा राम रहीम इंसा को बलात्कार के आरोप में बीस साल कैद की सजा सुनाई गई है। आसाराम बापू और उनका बेटा नारायण सांई अपने आश्रम की महिलाओं के यौन शोषण मामले में जेल में बन्द हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि ऐसे घृणित आरोप किसी साधारण व्यक्ति पर नहीं बल्कि धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले लोगों पर हैं, जो खुद पर विश्वास और आस्था जताने वाले लोगों के समूहों में यह प्रवचन देते रहे हैं कि मनुष्य को आत्मसंयम रखना चाहिए। अपनी इन्द्रियों को वश में रखना चाहिए और सत्य की राह पर चलना चाहिए। फिर ये खुद ही ऐसे घृणित कामों में लिप्त क्यों पाये जाते हैं?
सबसे ज्यादा अफसोस की बात तो यह है कि इनकी शिकार ज्यादातर वे मासूम महिलाएं होती हैं जो इन पर अंधश्रद्धा और आस्था लेकर अपने दुखों के निवारण के लिए इनकी शरण में आती हैं और इनकी सेवा में रत रहती हैं। आखिर क्या कारण है कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के चेहरे बेनकाब होने और उन्हें जेल भेजे जाने के बाद भी भारतीय जनमानस में चेतना और जागृति नहीं उत्पन्न हो रही? वह सच को स्वीकार नहीं करना चाहती है? दरअसल, भारत में शिक्षा, विज्ञान और चेतना का प्रसार अभी भी बहुत कम है। यहां भूख है, गरीबी है, लाचारी है, बीमारी है और बेरोजगारी है। इससे निकलने को छटपटा रही जनता मन्दिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, मठों, आश्रमों में अपने दुखों का निवारण ढूंढती रहती है।
अब चूंकि लोग सीधे भगवान से नहीं मिल सकते तो ऐसे में पाखंडी बाबाओं को भोली-भाली जनता को ठगने का जरिया मिल जाता है जो खुद को ईश्वर का अवतार बताते हैं और लोगों की समस्याओं को हल करने का दावा करते हैं। अगर संयोग से ऐसे बाबाओं के सम्पर्क में आने से किसी का बिगड़ा काम बन जाता है तो वे उस बाबा को भगवान समान मानने लगते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि सिर्फ गरीब, अनपढ़ लोग ही नहीं बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे ढोंगी बाबाओं की बातों को सुनते और गुनते हैं। आखिर कब हमारी आंखें खुलेंगी और कब हम समझेंगे कि हमारे अंधविश्वास के कारण ही ऐसे बाबाओं का कारोबार बढ़ता है और ये हमें ऐसे ही लूटते रहते हैं।
दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य तो यह है कि देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां इन बाबाओं की सत्ता के आगे नतमस्तक हैं क्योंकि इनके समर्थक ही उनका वोट बैंक है। ऐसे कठिन वक्त में जनता को खुद ही जागना होगा। खुद समझना होगा। समाज में चेतना लाने के लिए पढ़े-लिखे और समझदार मनुष्यों को आगे आकर अपनी मां-बहनों की रक्षा खुद करनी होगी।
Updated on:
09 Oct 2017 04:43 pm
Published on:
09 Oct 2017 04:43 pm
