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तकनीक न बने बीमारी

मोबाइल अथवा कम्प्यूटर का उपयोग सीमित मात्रा में किया जाए तो बेहतर। इसका उपयोग बच्चों को ना करने देना सबके हित की बात है।

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Sunil Sharma

Mar 04, 2018

kids playing with smartphone

kids playing with smartphone

ब्रिटेन के ‘हार्ट ऑफ इंग्लैण्ड फाउण्डेशन’ का ताजा शोध चौंकाने वाला है। खासकर उन अभिभावकों के लिए जो अपने बच्चों की प्रतिभा का देखकर फूले नहीं समाते। फाउण्डेशन के शोध में खुलासा हुआ है कि हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके मोबाइल की टच स्क्रीन से छोटे बच्चों की अंगुलियों पर बुरा असर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार टच स्क्रीन से अंगुलियों की मांसपेशियां इतनी प्रभावित होने लगी हैं कि बच्चों को पढ़ाई के लिए पेन या पेंसिल पकडऩे में भी परेशानी होती है।

ये तो हुआ एक शोध। मोबाइल के बढ़ते चलन से होने वाली परेशानियों को लेकर आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। मोबाइल के अत्याधिक उपयोग से अनेक बीमारियों की आशंका की बातें भी सामने आती रही हैं। खासकर कम उम्र के बच्चों में बीमारियों की आशंका अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है। लेकिन अहम सवाल यही है कि अखिर कमम उम्र के बच्चों को मोबाइल दिया ही क्यों जाता है? सामान्यता देखने में आता है कि शहरों में दस-बारह साल के स्कूली बच्चे भी मोबाइल रखने लगे हैं। यह भी सच है कि इतने छोटे बच्चे स्वयं तो मोबाइल खरीद नहीं सकते।

जाहिर है ये मोबाइल इन्हें उनके अभिभावक ही खरीदकर देते होंगे। और, मोबाइल भी काम चलाऊ नहीं बल्कि महंगे-महंगे स्मार्टफोन देने का चलन बढ़ रहा है। अभिभावक शायद इसमें भी अपनी शान समझते हैं। आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का इस्तेमाल करना समय की मांग होती है और इससे किसी को इनकार नहीं। लेकिन ध्यान रखने की बात ये है कि इसका उपयोग कौन और कितना कर रहा है? बड़े शहर ही नहीं अब तो छोटे शहरों में भी मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बीमारी का रूप लेता जा रहा है। ऐसी बीमारी जिसका इलाज किसी डॉक्टर के पास नहीं है।

इसका इलाज स्वयं हमारे पास है। मोबाइल अथवा कम्प्यूटर का उपयोग सीमित मात्रा में किया जाए तो बेहतर। इसका उपयोग बच्चों को ना करने देना सबके हित की बात है। बात सिर्फ पेन या पेंसिल नहीं पकड़ पाने तक ही सीमित नहीं रह गई है। मोबाइल पर अधिक देर बात करने से सुनने में परेशानी की शिकायतें भी बढऩे लगी है। इसलिए बेहतर यही हो कि इनके अत्याधिक उपयोग से बचा जाए और बच्चों को इनकी पहुंच से दूर रखा जाए।