बिलावल की भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों में सुधार लाना नहीं है। वह गोवा में 4 और 5 मई को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में शामिल होने आ रहे हैं। जिस दिन यह खबर आती है, उसी दिन भारतीय सैनिकों पर आतंकी हमला यह बताता है कि संबंध सुधार की राह पर एक कदम भी कांटे बिछाने वालों को मंजूर नहीं है।
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते इतने तल्ख हो चुके हैं कि करीब बारह साल बाद होने वाली पाक विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी की भारत यात्रा से किसी नई शुरुआत की उम्मीद करना जल्दबाजी ही होगी। वैसे भी बिलावल की भारत यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों में सुधार लाना नहीं है। वह गोवा में 4 और 5 मई को होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में शामिल होने आ रहे हैं। जिस दिन यह खबर आती है, उसी दिन भारतीय सैनिकों पर आतंकी हमला यह बताता है कि संबंध सुधार की राह पर एक कदम भी कांटे बिछाने वालों को मंजूर नहीं है।
बीस साल पुराने इस संगठन में भारत और पाकिस्तान के अतिरिक्त रूस और चीन के साथ-साथ मध्य एशियाई देश कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। ईरान हाल ही में इसका सदस्य बना है और पहली बार एससीओ की बैठक में शामिल होगा। एससीओ की बैठक ऐसे समय हो रही है जब यूक्रेन युद्ध के कारण दुनिया कई खेमों में बंटती नजर आ रही है और आर्थिक प्रगति की दौड़ में चीन की बढ़त ने स्थापित विश्व-व्यवस्था में खलबली मचा रखी है। विश्व व्यापार संगठन का वर्चस्व समाप्त हो रहा है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र भी कटघरे में है। दुनिया फिर से द्विपक्षीय समझौतों पर ज्यादा भरोसा करने लगी है। पाकिस्तान इन दिनों बड़े आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। भारत के खिलाफ जहर उगलते रहना वहां के राजनेताओं की सियासी मजबूरी है। लेकिन, उसे यह भी मालूम है कि पड़ोस से व्यापारिक रिश्ते सुधार कर वह अपनी आर्थिक हालत में सुधार कर सकता है। पाकिस्तान का एक वर्ग ऐसी मांग कर भी रहा है।
एससीओ की बैठक में आकर पाकिस्तानी विदेश मंत्री भारत से संबंध सुधारने की इच्छा का परोक्ष संदेश भी देना चाहते हैं। पाकिस्तान, क्षेत्रीय सहयोग संगठन में अपना औचित्य भी बनाए रखना चाहता है। आर्थिक बदहाली से डरे पाक को डर है कि उसे कहीं दुनिया की व्यवस्थाओं से दरकिनार न कर दिया जाए। पाकिस्तान हर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल भारत को कोसने के लिए करता रहा है। बिलावल तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान के लिए चर्चित रहे हैं। भारत का दुर्भाग्य है कि उसके संबंध अपने दो पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन से हमेशा खराब रहे हैं। हम अपने पड़ोसियों को बदल नहीं सकते। इसलिए भारत लगातार संबंध सुधारने के प्रयास करता रहा है, पर हमेशा उसे धोखा मिला है।