24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘शिक्षा के माध्यम से सार्क देशों के आपसी संबंध मजबूत करना लक्ष्य’

इंटरनेशनल डे ऑफ फ्रेंडशिप पर विशेष

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Nitin Kumar

Jul 30, 2024

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए समर्पित संगठन के रूप में मित्रता का मूर्त रूप है। सार्क देशों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने, रिश्तों में बुनियादी मजबूती देने के लिए यह यूनिवर्सिटी एक सुदृढ़ सेतु का कार्य कर रही है। अन्य शिक्षा केंद्रों से अलग यह विश्वविद्यालय किन उद्देश्यों पर काम करता है, इस बारे में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन प्रो के.के. अग्रवाल के साथ पत्रिका संवाददाता डॉ. मीना कुमारी की बातचीत के मुख्य अंश:

प्रश्नः साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (एसएयू) के अध्यक्ष के रूप में आप अंतरराष्ट्रीय मित्रता को कैसे देखते हैं?

उत्तरः भारत देश वसुधैव कुटुंबकम् के सिद्धांत में विश्वास करता है। हमारे यहां बहुत से ऐसे विशेष दिन है जो भाई-बहन, भाई-भाई, मित्रों के रिश्ते को मजबूत करते हैं। वास्तविक उद्देश्य मेल-जोल बढ़ाना ही होता है। सार्क देशों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक-शैक्षणिक-भौगोलिक स्थिति सुदृढ़ हो, यही इस यूनिवर्सिटी का उद्देश्य है। दो राष्ट्रों की मित्रता से पहले व्यक्ति की व्यक्ति से मित्रता होना जरूरी है।

प्रश्नःउत्तरः इस यूनिवर्सिटी की नींव किन उद्देश्यों के आधार पर, कब और कैसे रखी गई थी?

उत्तरः वर्ष 1985 में दक्षिण एशियाई देशों के बीच आपसी सहयोग व सौहार्दपूर्ण रिश्तों के लिए साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (सार्क) का गठन हुआ जिसके सदस्य देश भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान और मालदीव हैं। जब 2010-11 में भारत इसका अध्यक्ष बना तो विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना बनी, जहां सभी सार्क देशों के छात्र शोध एवं अनुसंधान कर सकें और क्षेत्रीय समस्याओं एवं चुनौतियों का मिलकर समाधान निकाल सकें। अग्रणी भूमिका निभाते हुए भारत ने इस विश्वविद्यालय परिसर के लिए दिल्ली में करीब 100 एकड़ जमीन मुहैया कराई। शेष अन्य देशों ने भी आर्थिक भागीदारी निभाई, जिससे करीब 1200 करोड़ रुपए की लागत से भव्य इमारत का निर्माण हो सका।

प्रश्नः विश्वविद्यालय के माध्यम से सार्क देशों की आपस में मित्रता हेतु क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

उत्तरःगवर्निंग बॉडी में हर देश के दो-दो सदस्य हैं। यानी भारत सबसे ज्यादा व्यय करेगा परंतु इसके संचालन में सभी देश बराबर की भूमिका निभाएंगे। यह भारत की दोस्ती की मिसाल है।

प्रश्नः सार्क, जी 20 जैसे प्लेटफार्म दोस्ती बढ़ाने में कितने सहायक लगते हैं?

उत्तरः ये सभी प्लेटफॉर्म राष्ट्र स्तर के हैं और ये प्लेटफॉर्म देशों के बीच मित्रता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुए हैं। व्यक्तिगत वेलफेयर पर फोकस से राष्ट्रों के बीच मित्रता हो तो और भी ज्यादा कारगर होगी।

प्रश्नः दो देशों के बीच रिश्तों में उतार-चढ़ाव चलता रहता है, छात्रों पर इसके असर को कैसे अनुभव किया? भारत व पाकिस्तान के छात्रों में कभी कोई टकराव?

उत्तरः इस समय पाकिस्तान के छात्र नहीं हैं। जब थे, तब भी कभी कोई विवाद नहीं हुआ।

प्रश्नः एक दूसरे की कला-संस्कृति को जानने-समझने के लिए यहां कैसे प्रयास किए जाते हैं?

उत्तरः बिल्कुल। मेल-जोल बढ़ाने के लिए हर देश के खास त्योहार, सभी छात्र मिलकर मनाते हैं। आठों देशों के राष्ट्रीय उत्सव, मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, त्योहार भी मिलकर मनाते हैं। महीने में किसी एक दिन दूसरे देश का खाना बनता हैं। पहले सभी देशों का फूड फेस्टिवल भी होता था जो अब फिर से शुरू करने की योजना है। संग्रहालय बनाने की भी योजना है, जहां सभी देशों की कला-संस्कृति प्रतीकात्मक रूप से दर्शाई जा सके। जैसा कि एक्ट में शामिल है, यदि हम इस यूनिवर्सिटी के सेंटर अन्य देशों में भी खोलते हैं तो यह प्रयास आपसी मित्रता को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। शैक्षिक नवाचार के लिए सार्क देशों के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को एक सेमेस्टर के लिए आमंत्रित करने की भी योजना है।

प्रश्नः यह यूनिवर्सिटी किस प्रकार से अलग है? यहां किन विषयों का अध्ययन व शोध होता है?

उत्तरः सार्क देशों के साझा और एक समान विषयों पर अध्ययन होता है। जैसे जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, लैंड स्लाइड्स, सुनामी, साइक्लोन, समुद्र तटीय प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय। साझा समस्याओं पर गहन अध्ययन ही यूनिवर्सिटी का उद्देश्य है। जैसे उत्तराखण्ड, हिमाचल में लैंड स्लाइड्स पर हमारे वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं वैसे ही यदि साथ में नेपाल के कुछ क्षेत्रों पर भी अध्ययन कर लिया जाए तो शोध और उसकी उपयोगिता बढ़ जाएगी और आर्थिक दबाव भी कम होगा।

प्रश्नः क्या यहां भी एनईपी को लागू किया गया है? अन्य देश के विद्यार्थियों पर इसका कैसा प्रभाव रहेगा?

उत्तरः नई शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं को प्रमोट किया गया है। इसी तरह सार्क देशों की भाषाएं शामिल करने का प्रयास है।

प्रश्नः आपके सामने प्रशासनिक दृष्टि से क्या-क्या चुनौतियां हैं?

उत्तरः आर्थिक असमानता देशों की दोस्ती के बीच आ रही है तो उसमें कुछ सुधार करना होगा। वहीं यह भी मानना चाहिए कि कभी भी यह असमानता पूर्ण रूप से खत्म नहीं हो सकती।