
यूक्रेन, जो कभी गेहूं, मक्का, जौ और सूरजमुखी के भारी उत्पादन के कारण यूरोप का 'ब्रेडबास्केट' कहलाता था, आज एक ऐसा युद्धग्रस्त देश बन गया है, जो विनाश की ओर बढ़ रहा है। इसकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, लाखों लोग बेघर हो गए हैं या फिर पलायन कर गए हैं। इस युद्ध के पीछे सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। यूक्रेन की विशाल खनिज संपदा, उपजाऊ भूमि और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति ने इसे वैश्विक शक्तियों के बीच एक मोहरा बना दिया है। रूस और अमरीका, दोनों की नजरें लंबे समय से इस देश के प्राकृतिक संसाधनों पर टिकी हुई हैं, और यही इसकी तबाही का सबसे बड़ा कारण बन गया है। यूके्रन एक प्राकृतिक संपदा से भरपूर देश है। यहां यूरोप के सबसे उपजाऊ खेत, दुनिया के कुछ सबसे बड़े लिथियम व टाइटेनियम भंडार और दुर्लभ खनिज मौजूद हैं। 1991 में सोवियत संघ से अलग होने के बाद इस देश में अपार संभावनाएं थीं। लेकिन इसके प्राकृतिक संसाधन ही इसकी समृद्धि के बजाय विपत्ति का कारण बन गए। न केवल रूस, बल्कि अमरीका और पश्चिमी देश भी इस पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं।
यूक्रेन विभिन्न खनिज संपदाओं से समृद्ध है जैसे- लिथियम (इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी निर्माण में महत्त्वपूर्ण), टाइटेनियम (एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग के लिए उपयोगी), ग्रेफाइट और कोबाल्ट (ऊर्जा भंडारण और उच्च तकनीक उत्पादों के लिए अनिवार्य) तथा लौह अयस्क और कोयला (भारी उद्योगों के लिए आवश्यक)। इसके अलावा, यूक्रेन की उपजाऊ काली मिट्टी इसे विश्व के सबसे बड़े अनाज उत्पादकों में से एक बनाती है। यह वैश्विक गेहूं और मक्का निर्यात का महत्त्वपूर्ण स्रोत रहा है। प्राकृतिक गैस और तेल के भंडार भी इसकी आर्थिक शक्ति को बढ़ाने में सक्षम थे। रूस के लिए यूक्रेन केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामरिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जुड़ा एक अहम क्षेत्र है। सोवियत संघ के विघटन के बाद, रूस ने हमेशा यूक्रेन को अपने प्रभाव क्षेत्र में रखने की कोशिश की। इसके संसाधनों और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए, रूस ने 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला कर दिया।
दूसरी ओर अमरीका और पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को अपने प्रभाव में लाने के लिए लगातार प्रयास किए। यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की कोशिश ने रूस को भड़का दिया। अमरीका की बड़ी टेक कंपनियां और रक्षा उद्योग यूक्रेन के दुर्लभ खनिजों पर नजर रखे हुए हैं। युद्ध के प्रभाव से यूक्रेन के लाखों लोग विस्थापित हुए, उद्योग नष्ट हो गए और अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। जो देश कभी गेहूं और मक्का का सबसे बड़ा निर्यातक था, वह अब खाद्यान्न संकट का सामना कर रहा है। हाल की घटनाओं पर नजर डालें तो अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मतभेद का मुख्य मुद्दा रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की रणनीति और यूक्रेन के प्राकृतिक संसाधनों पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण है। अमरीका चाहता है कि यूक्रेन मौजूदा स्थिति में युद्धविराम कर ले। ऐसा होने पर यूक्रेन का लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र, जहां प्रचुर प्राकृतिक संसाधन हैं, रूस के कब्जे में रह जाएगा। साथ ही, अमरीका की शर्त है कि यूक्रेन 350 बिलियन डॉलर की पूर्व सहायता (जो कुछ एजेंसियों के अनुसार 128 बिलियन डॉलर है) को खनिजों के दोहन से लौटाए। इस प्रस्ताव में यूक्रेन को भविष्य की सुरक्षा की कोई ठोस गारंटी नहीं दी गई है। यूक्रेन इस फॉर्मूले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। यह उसके हितों और संप्रभुता के खिलाफ है क्योंकि ट्रंप का प्रस्ताव रूस के कब्जे वाली जमीन और संसाधनों को वापस लेने की गारंटी नहीं देता, जिसे यूक्रेन अपनी राष्ट्रीय अखंडता के लिए जरूरी मानता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत भूभाग पर रूस का कब्जा है, जिसमें उसके कुल खनिज भंडार का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा शामिल है। 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन की जीडीपी में 29-35 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जो देश के इतिहास की सबसे बड़ी मंदी थी। विश्व बैंक के अनुसार, 2023 में इसमें मामूली सुधार हुआ, लेकिन यह अब भी 2021 के पूर्व-युद्ध स्तर (लगभग 200 बिलियन डॉलर) से काफी नीचे है। प्रति व्यक्ति आय 2023 में 5181 डॉलर रही, जो वैश्विक औसत से कम है। युद्ध ने उद्योगों, बुनियादी ढांचे और कृषि को तबाह कर दिया, जिससे निर्यात घटा और लाखों लोग विस्थापित हुए। नतीजतन, गरीबी दर 5.5त्न से बढ़कर 24.2त्न हो गई, और 71 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए। पुनर्निर्माण के लिए 400 बिलियन डॉलर से अधिक की जरूरत है, जो यूक्रेन की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक दबाव बनाए रखेगा।
हालांकि, यूरोपीय समुदाय और इसके सदस्य देशों ने 2022 से अब तक यूक्रेन को लगभग 145 अरब डॉलर की सहायता दी है, जिसमें वित्तीय, सैन्य, मानवीय और शरणार्थी सहायता शामिल है। इस सहायता ने यूक्रेन के जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया है। रूस और यूक्रेन के इस युद्ध में किस देश को क्या हासिल होगा, यह भविष्य बताएगा। लेकिन यह तय है कि इसका प्रतिकूल प्रभाव न केवल दोनों देशों, बल्कि राजनीतिक अस्थिरता के चलते समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
Published on:
05 Mar 2025 10:41 pm
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