
Gokarna Tourism
संजय शेफर्ड (ट्रैवल ब्लॉगर, मुश्किल हालातों में काम करने वाले दुनिया के श्रेष्ठ दस ब्लॉगर में शामिल)
बचपन से कई बार गोवा जा चुका हूं लेकिन अब यह जगह कुछ पुरानी पडऩे लगी है। इसलिए सोचा क्यों न इस बार गोकर्ण चला जाए और बैकपैक पीठ पर लाद गोकर्ण पहुंच गए। आपको भी यदि नई जगह की तलाश है तो गोकर्ण अच्छा विकल्प हो सकता है।
गोकर्ण कर्नाटक में स्थित एक छोटा-सा शहर है जो अपने समुद्र तटों, प्राचीन मंदिर और लुभावने परिदृश्यों के लिए जाना जाता है। इस जगह पर एक तरफ जहां लोग मौजमस्ती के लिए आते हैं वहीं दूसरी तरफ धर्म-अध्यात्म और दर्शन के लिए। और फिर एक बहुत ही खूबसूरत अनुभव लेकर लौटते हैं। इस छोटी-सी जगह पर आपको शांत समुद्र का किनारा मिलता है, मंदिर मिलते हैं और घूमने के लिए कई तरह के अन्य दर्शनीय स्थल और देश-विदेश से आए सैलानी।
यह एक प्राचीन शहर है, जिससे तमाम तरह की किंवदंतियां जुड़ी हैं। माना जाता है कि गंगावली और अग्नाशिनी दो नदियों के कान के आकार के संघ में स्थित गोकर्ण का इतिहास युगों-युगों पुराना है। कुछ लोग कहते हैं कि गोकर्ण वह स्थान है जहां भगवान शिव एक गाय के कान से निकले थे। कुछ गोकर्ण को गोकर्ण और ढुंढारी का घर भी बताते हैं।
इस जगह से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि रावण को भगवान शिव ने इसी जगह पर शक्तिशाली हथियार अतुलिंगा दिया था और कहा था कि इसे जिस जगह पर पहली बार रखा जाएगा, यह वहीं पर रह जाएगा। खैर, यह तो हो गईं पौराणिक बातें। आधुनिक काल की बात करें तो गोकर्ण सोढे और विजय नगर राज्यों का हिस्सा था। जब गोवा सहित कोंकण क्षेत्र पर पुर्तगालियों का कब्जा हो गया, तो यह उनके शासन का हिस्सा बन गया था। यात्रा पर मौसम का बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है।
यदि आप अपनी गोकर्ण यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं तो अक्टूबर और मार्च के बीच जाएं। यह गोकर्ण घूमने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। मार्च के बाद जैसे ही गर्मी का मौसम आता है यह जगह गर्म होने लगती है। कई बार तो तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो जाता है। इसीलिए बेहतर होगा कि आप सर्दियों के महीनों में गोकर्ण घूमने जाएं। यह राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जिसकी वजह से आपको अपने बजट में ठहरने की जगह मिल जाएगी।
Published on:
14 Jan 2021 07:13 am
