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समझें भावनात्मक  प्रबंधन का महत्त्व

कार्यस्थल पर ऐसा सकारात्मक भाव उत्पन्न किया जा सकता है, जो कर्मचारियों की उत्पादकता और कल्याण में वृद्धि करे। साथ ही, नकारात्मक भावनाओं को कम और प्रबंधित कर सकता है।

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Patrika Desk

Apr 18, 2022

समझें भावनात्मक  प्रबंधन का महत्त्व

समझें भावनात्मक  प्रबंधन का महत्त्व

प्रो. हिमांशु राय
निदेशक,
आइआइएम इंदौर
पिछले कुछ दशकों से 'इमोशनल इंटेलिजेंस' अवधारणा पर निरंतर शोध और अध्ययन होते रहे हैं। ये विभिन्न पहलुओं और कार्य-संबंधित परिणामों के साथ इसके संबंधों का खुलासा करते हंै। एसोसिएशन ऑफ टैलेंट डेवलपमेंट (एटीडी) की ओर से आयोजित एक सम्मेलन में लेखक और नेतृत्व कोच साइमन सिनेक ने एक नेतृत्व दृष्टिकोण की चर्चा की, जो मानव के भीतर विभिन्न भावनाओं को उत्पन्न करने वाले रसायनों पर केन्द्रित है। यह एक लीडर को अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और तकनीकों और प्रथाओं को विकसित करने और प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है। इससे कार्यस्थल पर ऐसा सकारात्मक भाव उत्पन्न किया जा सकता है, जो कर्मचारियों की उत्पादकता और कल्याण में वृद्धि करे। साथ ही, नकारात्मक भावनाओं को कम और प्रबंधित कर सकता है। निस्संदेह यह लीडरों को संगठनात्मक संस्कृति के भावनात्मक पहलुओं में व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में भी मदद कर सकता है, जिससे उन्हें बेहतर दीर्घकालिक नीतियों की कल्पना करने में सहायता मिलती है।
इसी प्रकार, फोब्र्स के साथ एक साक्षात्कार में, रटगर्स विश्वविद्यालय की जैविक मानवविज्ञानी डॉ. हेलेन फिशर ने विस्तार से बताया कि व्यक्तित्व मस्तिष्क रसायन विज्ञान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चार प्रकार के जैविक स्वभाव या व्यक्तित्व के बारे में बताया जो किसी व्यक्ति की प्रमुख नेतृत्व शैली के एक हिस्से को आकार देते हैं। 'एक्सप्लोरर' - जो चुनौतियों का सामना करता है और डोपामिन को प्रमुखता से व्यक्त करता है, 'डायरेक्टर' - जो संकेत को नियंत्रित करने के लिए एक टेस्टोस्टेरोन के प्रभुत्व से उत्साह प्रदर्शित करता है; 'बिल्डर' - जो सेरोटोनिन के प्रभाव को व्यक्त करने वाले सिस्टम को बनाए रखता है और 'नेगोशिएटर' - जो ऑक्सीटोसिन के प्रमुख प्रभाव से प्रदर्शित करने, विश्वास बनाने और संबंधों को पोषित करने में कुशल बनाता है।
एक व्यक्ति अपने पिछले अनुभवों या अन्य स्थितिजन्य कारकों के आधार पर इनमें से एक से अधिक स्वभाव के लक्षणों का संयोजन भी प्राप्त कर सकता है, या एक स्वभाव या शैली से दूसरे को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि इस तरह के सिद्धांतों और वर्गीकरण के लिए प्रबंधन और नेतृत्व पर मौजूदा साहित्य के एक हिस्से के रूप में व्यापक रूप से अपनाए जाने के लिए अधिक शोध साक्ष्य की आवश्यकता होती है। ये शुद्ध विज्ञान के परिप्रेक्ष्य से व्यक्तित्व, व्यवहार और नेतृत्व को समझने का प्रयास करते हैं। ऐसे लीडर और प्रबंधक, जो स्वयं में और दूसरों के बीच इस तरह के लक्षणों की पहचान करने में सक्षम हैं, वे टीमों के भीतर विविधता का प्रबंधन करने के लिए प्रासंगिक और उपयुक्त दृष्टिकोण प्रस्तुत कर पाते हैं।
संगठनात्मक व्यवहार के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं के बारे में जागरूकता और संज्ञान में सुधार करके, लीडर अपने दृष्टिकोण को व्यापक बना सकते हैं और नेतृत्व के लिए नए और संभवत: प्रभावी दृष्टिकोण खोजने के लिए विज्ञान को नेतृत्व से जोड़ सकते हैं।