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आपकी बात, सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी का क्या असर हो रहा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Nov 09, 2022

आपकी बात, सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी का क्या असर हो रहा है?

आपकी बात, सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी का क्या असर हो रहा है?

मजबूरी का फायदा न उठाए सरकार
सही समय पर सरकारी विभागों में पद नहीं भरने के कारण युवा संविदा पर कार्य करने को मजबूर हैं। संविदा की नौकरी पूर्णतया अस्थायी है और ऐसे कर्मचारियों को उचित वेतन व अन्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं। काम का बढ़ता बोझ व कम वेतन उनको मानसिक रोगी बना रहा है। बेरोजगारों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
- नगेंद्र चारण, जोधपुर
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संविदा कर्मचारी शोषण के शिकार
संविदा कर्मचारी कम वेतन में अधिक परिश्रम करते हैं। जाहिर है संविदा कर्मचारियों का शोषण होता है। उन्हें कभी भी इस नौकरी से हटाया जा सकता है। फिर वे न घर के रहते हैं, न घाट के। दूसरी तरफ सरकार संविदा कर्मचारियों की भर्ती कर उन बेरोजगार युवकों के साथ भी धोखा कर रही है, जो सालों से अनेक प्रकार की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
-एकता शर्मा, जयपुर
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तनावग्रस्त रहते हैं संविदा कर्मचारी
सरकारी कार्यालयों में संविदा पर जो कर्मचारी नियुक्त हैं, उन पर कार्यभार तो स्थायी कार्मिक जितना ही है, पर उनको वेतन बहुत कम दिया जाता है। इसलिए वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। साथ ही वे मानसिक तनाव में भी रहते हैं। सरकार कामगारों को उनको स्थायी करे, जो वर्षों से संविदा पर कार्यरत हैं।
-लता अग्रवाल, चित्तौडग़ढ़
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छात्रों के साथ छलावा
संविदा नौकरी प्रतियोगी छात्रों के साथ छलावा है, इससे वे अपने लक्ष्य से भटकेंगे। प्रतिस्पर्धा के युग मे पारदर्शिता जरूरी है । राजनीतिक अप्रोच हावी होगी, जिससे योग्य को अवसर नहीं मिल पाएगा ।
-योगेश सुथार, जीयाबेरी
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समान काम, समान वेतन सिद्धांत की अनदेखी
संविदा कर्मचारियों को 'समान काम, समान वेतन' सिद्धांत का लाभ नहीं मिल रहा है। आए दिन सरकारें अपने आर्थिक भार को कम करने तथा राजनीतिक फायदा लेने के लिए संविदा नौकरियों की घोषणा करती हंै। संविदा नौकरी अल्पावधि होने के कारण बाद में आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा बन जाता है।
- कुमार जितेन्द्र, मोकलसर, बाड़मेर
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दो नाव, पतवार एक
विद्यार्थी बेचारे बड़ी दुविधा में फंस गए हैं। वे सोच रहे हैं कि रीट की तैयारी करें तो संविदा से चूकेंगे और संविदा में लगे तो रीट से चूकेंगे।
-प्रियव्रत चारण, जोधपुर
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सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं
संविदा पर नौकरी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं देती। स्थायी रोजगार नहीं मिलने से व्यक्ति का चित्त अशांत रहता है। वेतन-भत्ते कम होने और संविदा खत्म होने पर भविष्य की चिंता सताती है। ओवर ऐज का खतरा सताता रहता है।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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नियमित सीधी भर्ती की जाए
सरकारी विभागों में संविदा भर्ती पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। संविदा भर्ती की बजाय नियमित व सीधी भर्ती अच्छा विकल्प है, जिसके माध्यम से विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की कमी को पूरा किया जा सकता है।
-अनोप भाम्बु, जोधपुर
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बिगड़ती है व्यवस्था
संविदा पर नौकरी देने से सरकारी विभाग की व्यवस्था बिगड़ती है। कामगारों के मन में यह बात रहती है कि उन्हें अस्थायी तौर पर रखा गया है। इसलिए वे काम को लेकर गंभीर नहीं होते।
- गजानन पाण्डेय, हैदराबाद