
भारत में लोकतंत्र की सफलता का रहस्य
आशुतोष कुमार
प्रोफेसर और अध्यक्ष
राजनीति विज्ञान विभाग
पंजाब विश्वविद्यालय
लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की असाधारण सफलता का जश्न चल रहा है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमरीकी देश, जो भारत के बाद आजाद हुए, वहां या तो लोकतंत्र बचा नहीं अथवा वहां उतार-चढ़ाव वाली स्थिति रही। भारत में इसकी जड़ें व्यापक और गहरी हुई हैं। इस सफलता की जड़ भारत की विश्वसनीयता में निहित है। भारत राजनीतिक लोकतंत्र के रूप में ढांचागत कमजोरियों से बाहर निकलने में कामयाब रहा है। पश्चिम के पुराने संगठित लोकतंत्रों के विपरीत, नया स्वतंत्र भारत घोर गरीबी, निरक्षरता, सामाजिक और आर्थिक असमानता से त्रस्त था। सदियों पुरानी विकृत सामाजिक व्यवस्था ने अधिसंख्य आबादी को सम्पत्ति, स्तर और ताकत की किसी भी हिस्सेदारी से वंचित कर रखा था। यह स्थिति सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना में बड़ी बाधक थी। कुटिल औपनिवेशिक शासन ने भारतीयों को विभाजित किया, जो विभाजन और साम्प्रदायिक हिंसा की वजह बना। यह भी माना जाता है कि लोकतंत्र ऐसे समाज में जड़ें जमाता है, जहां लोग समान धर्म, भाषा और संस्कृति साझा करते हैं।
Updated on:
06 Oct 2022 09:53 pm
Published on:
06 Oct 2022 06:25 pm
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