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आपकी बात, लाखों लोग अब भी फुटपाथ पर रात बिताने के लिए मजबूर क्यों हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Jan 21, 2021

आपकी बात, लाखों लोग अब भी फुटपाथ पर रात बिताने के लिए मजबूर क्यों हैं?

आपकी बात, लाखों लोग अब भी फुटपाथ पर रात बिताने के लिए मजबूर क्यों हैं?

संवेदनहीनता का नतीजा
सरकारों की गैर जिम्मेदारी और स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता की वजह से आज भी लाखों लोग अब भी फटपाथ पर रात बिताने के लिए मजबूर हैं। बहुत स्पष्ट है कि कोई भी स्वेच्छा से फुटपाथ पर नहीं रहता । कोई बेघर, बीमार या आकस्मिक वजह से फुटपाथ पर सोकर अपनी रात गुजारता है। सरकार श्रम कानूनों को और अधिक मजबूत और उत्तरदाई बनाए कि श्रमिक दिनभर काम करने के बाद आराम से खा पीकर सो सकें। अन्य मजबूर लोगों को रात्रि विश्राम के लिए वर्ष भर लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाऐं। इसके लिए न्यूनतम शुल्क वसूला जाना भी अनुचित नहीं है।
-ईश्वर जैन कौस्तुभ , उदयपुर
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रैन बसेरों की कमी
देश की आजादी के बाद अनेक सरकारें आर्इंं और गईं, लेकिन सड़क किनारे सोने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी के चलते हादसे बढ़ रहे हैं। फुटपाथ पर सोने वाले श्रमिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रैन बसेरे बनाने का आदेश दिया था, परन्तु रखरखाव के अभाव में शेल्टर होम बंद पड़े हैं। देश और राज्य में लाखों श्रमिक और भिक्षुक परिवार रात भर फुटपाथ पर सोने को मजबूर हंै।
-कांतिलाल मांडोत, सूरत
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मजबूरी है फुटपाथ पर सोना
महंगाई के इस दौर में जहां दो वक्त की रोटी भी बहुत कठिनाई से मिलती है, वहां घर का सपना देखना तो बेमानी ही है। दिन भर हाड़-तोड़ मेहनत करने के बाद जब रात को सोने के लिए मजदूर किसी घर के सामने या दुकान के सामने सोने की कोशिश करते है तो दुत्कार दिया जाता है। ऐसे में केवल फुटपाथ पर ही सोने का विकल्प बचता है। वहां भी हाईवे पर भारी वाहनों के रूप में दौड़ते इन चलते-फिरते यमदूतों से पीछा नही छूटता और वे हादसे के शिकार हो जाते हैं।
-रेनू गुप्ता, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर
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गलत नीतियों का परिणाम
केंद्र व राज्य सरकारों की गलत नीतियों की वजह से आज भी लाखों लोग फुटपाथ पर रात बिताने को मजबूर हैं। इस समस्या का सबसे बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि एवं विकास योजनाओं का सही ढंग से संचालन नहीं होना है। जब प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी योजनाएं चल रही हैं, तो प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सबसे पहले इन लोगों को इन योजनाओं का लाभ दे। एक 5ो बड़े भवन हर शहर में होने चाहिए, जहां रात्रि में गरीब लोग रात गुजार सकें।
-राजेन्द्र शास्त्री, झालरापाटन, झालावाड़
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गांवों से पलायन है मुख्य वजह
हमारे देश में गांवों में रोजगार के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए ग्रामीण लोगों को आजीविका के लिए शहर में जाकर छोटी-मोटी नौकरी ढूंढनी पड़ती है। मुश्किल यह है कि शहरों में भी उन्हें अभाव में रहना होता है। गरीबी के चलते वेे कमरे का किराया वहन करने में समर्थ नहीं होते हैं। इसलिए दिनभर नौकरी ढूंढने, मजदूरी करने या भिक्षावृत्ति के बाद फुटपाथ पर सोने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता।
-मेघा गोयल, गोविंदगढ़, अलवर
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नहीं मिलता कहीं आश्रय
प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिक आवश्यकता है रोटी, कपड़ा और आवास। जब व्यक्ति के पास इनका ही अभाव होगा तो उसे प्रवास के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहां पर उनके लिए ना तो रहने के लिए रैन-बसेरों की और ना ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था होती है। जाहिर सी बात है उन्हें फुटपाथ पर सोने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, तभी तो सूरत में हुई घटना दिल दहला देने वाली है।
-धर्मचन्द भगत, कुचामन सिटी
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नहीं है पर्याप्त रैन बसेरे
गरीब और बेघर लोग सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर रात गुजारने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसका प्रमुख कारण है रोजगार की तलाश में गांवों से शहरों की ओर पलायन। साथ ही निर्धन एवं घुमंतुओं के लिए रैन बसेरों की पर्याप्त व्यवस्था का न होना है। यदि गरीबों व मजदूर वर्ग के लिए छत की व्यवस्था होती तो सूरत में फुटपाथ पर सोए 15 श्रमिकों की जान नहीं जाती। अत: जरूरतमंदों के लिए हर शहर या कस्बे में पर्याप्त संख्या में रैन बसेरों का निर्माण किया जाना चाहिए।
-भगवान प्रसाद गौड़, उदयपुर
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स्थायी रैन बसेरों का निर्माण किया जाए
स्थायी रैन बसेरों का निर्माण कर उसके परिचालन की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को दी जाए। साथ ही इन रैन-बसेरों को सुविधा सम्पन्न बनाया जाए। फुटपाथों पर रात्रि बसर करने वालों का सर्वे कर उनकेे आश्रय के लिए समुचित व्यवस्था की जाए। इस काम में समाज को भी भागीदार बनाया जाए।
-सत्तार खान कायमखानी, कुचेरा, नागौर
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सरकार निभाए जिम्मेदारी
सरकार को फुटपाथों पर सोने को मजबूर लोगों के लिए रैन बसेरों की व्यवस्था करनी चाहिए और सभी जगहों में उसका प्रचार-प्रसार कर ऐसे लोगों को रैन बसेरों में रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए। सरकार को अपनी जिम्मेदारी से बचना नहीं चाहिए।
-आलोक वालिम्बे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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नहीं है रहने की व्यवस्था
जिसके पास घर नहीं होगा, वह तो फुटपाथ पर ही रात गुजारेगा। सोने के लिए सार्वजनिक स्थलों की कमी है। शहरों में आकर लोग आजीविका का जुगाड़ तो जैसे-तैसे कर लेते हैं, परंतु रहने की व्यवस्था नहीं हो पाती है। अत: लोग फुटपाथ पर रात गुजारते हैं। गरीब और मानसिक रूप से कमजोर लोग, जो अकेले रहते हैं, उनके लिए भी फुटपाथ ही सहारा बनकर रह गया है।
-डा. माधव सिंह, श्रीमाधोपुर, सीकर
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नई आवास योजना की जरूरत
देश में बड़ी संख्या में मजदूर और बेघर लोग फुटपाथ पर रहते हैं। एक आवास योजना बनाई जाए, जिसमें ऐसे वास्तविक बेघर लोगों का चयन किया जाए। प्रशासन द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण भी हो, ताकि फुटपाथ पर इनकी संख्या कम हो।
-राजेन्द्र जांगिड़, जूना मीठाखेड़ा, बाड़मेर
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फुटपाथ पर सोना मजबूरी
लाखों लोग फुटपाथ पर रात बिताने के लिए मजबूर हैं। एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर मजदूरी करने वालों के लिए आवास की समस्या सबसे बड़ी है। ऐसे लोग दिनभर काम करते हैं और फुटपाथ पर ही सो जाते हैं। यहां वे हादसे के शिकार भी हो जाते हैं।
-मनोहर सिंह सोढा, बालोतरा
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गरीबी और बेरोजगारी की वजह से पलायन
लाखों लोग फुटपाथों पर सोते हैं। गरीबी और बेरोजगारी के चलते लोग गांवों से शहरों की तरफ पलायन करते हैं। शहरों में इनकी समस्याओं से किसी को लेना-देना नहीं होता। प्रशासन भी उनकी तरफ ध्यान नहीं देता। ऐसे में उनकी मुश्किलें कभी खत्म ही नहीं होती।
-ओम हरित, फागी, जयपुर
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सिर छिपाने के लिए नहीं है छत
लाखो लोग आज भी फुटपाथ पर रात बिताने के लिए इसलिए मजबूर हैं कि न तो उनके लिए पास आवास और न ही रैन बसेरों की समुचित व्यवस्था। इसकी वजह से लोगों को फुटपाथ पर रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
-देवेश अवस्थी, दौसा