पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
हर जगह है अंग्रेजी
लोगों को जमाने के साथ कदमताल मिलाकर चलने की इच्छा है, लेकिन अंग्रेजी के साथ अन्य भाषाओं को भी महत्त्व देना चाहिए। अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है, जिसका हर जगह इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए अंग्रेजी के प्रति रुझान बढऩा लाजमी है।
-सारिका सिंह, रायपुर, छत्तीसगढ़
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हिंदी के प्रति सरकारों की हेय दृष्टि
शिक्षा में अंग्रेजी माध्यम के प्रति रुझान इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि हमारी सरकारें भी हिंदी को हेय दृष्टि से देखती हैं। अंग्रेजी को आज अपनी प्रतिष्ठा का सिम्बल और अपनी शान मान बैठे हैं। दिखावे के लिए हम हिन्दी दिवस , हिन्दी सप्ताह या पखवाडा मनाते हैं, जबकि केंद्र व राज्य सरकारों के दफ्तरों में आज भी अंग्रेजी में ही अधिकांश कार्य होते हंै। राजस्थान में तो अलग से सरकारी अंग्रेजी माध्यम के सरकारी स्कूल चलाए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि शिक्षा में अंग्रेजी माध्यम के प्रति रुझान बढ़ेगा और हिंदी उपेक्षित होती रहेगी।
-सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
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नौकरी दिलाने में सहायक
अंग्रेजी नौकरी दिलाने में सहायक होती है। इसको बोलने और लिखने वाले को समाज में विशेष सम्मान से देखा जाता है। विदेश में शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय करने के नए अवसर उपलब्ध कराती है। और यदि विषय ज्ञान के साथ अंग्रेजी भाषा में पकड़ मजबूत हो तो व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रभावशाली हो जाता है।
-राजेश सराफ, जबलपुर, एमपी
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अंतरराष्ट्रीय भाषा है अंग्रेजी
अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा बन चुकी है। साथ ही तकनीकी की जानकारी के लिए भी अंग्रेजी सीखना जरूरी हो गया है। इसलिए शिक्षा में अंग्रेजी के माध्यम को प्राथमिकता दी जाने लगी है। इसका मतलब यह कदापि नहीं होना चाहिए कि यह हमारी सभ्यता और संस्कृति की प्रतीक, मातृभाषा का स्थान ले सकती है। अंग्रेजी को सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संवाद का जरिया समझना चाहिए।
-रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर
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अंग्रेजी माध्यम का जुनून
विदेशों मे मिलने वाली सुख - सुविधाओं को देखकर हमारे देश के पालकों में भी अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों मे पढ़ाने का एक जुनून सा हो गया है। उच्च अध्ययन के लिए अंग्रेजी मे हर विषय पर आसानी से उपलब्ध सामग्री के कारण भी अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई आवश्यकता बन गई है।
-नरेश कानूनगो, देवास, मध्यप्रदेश
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अंग्रेजी में पाठ्य सामग्री अधिक
हिंदी माध्यम की पाठ्यपुस्तकें बड़ी मुश्किल से ही मिल पाती हैं। हिंदी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षक भी बहुत कम हैं। गणित और विज्ञान विषय के अध्यापक तो बड़ी मुश्किल से ही मिल पाते हैं। हिंदी माध्यम स्कूलों में भी अंग्रेजी का ही प्रभुत्व होता है। अत: हिंदी माध्यम में पाठ्य सामग्री के अभाव और शिक्षकों की कमी होने के कारण ही लोगों का अंग्रेजी माध्यम के प्रति रुझान होना बढ़ रहा है।
विभा गुप्ता, मैंगलोर
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प्रतिष्ठा भी है कारण
शिक्षा में अंग्रेजी माध्यम के प्रति रुझान बढऩे के कई कारण हैं। जैसे विदेशों में रोजगार के अवसर अंग्रेजी के जानकार के लिए ज्यादा हैं। लोगों की यह सोच भी है कि इससे सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
-अश्विनी भार्गव , जयपुर ।
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हिंदी को न भुलाएं
लोग हिंदी की बजाय अंग्रेजी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। आम बोलचाल हो या पढ़ाई, अंग्रेजी का चलन बढ़ रहा है। आधुनिकता का दौर प्रतियोगिता का है। यदि किसी को अंग्रेजी नहीं आती है, तो वह अन्य लोगों से पीछे रह जाता है। इस वजह से अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भर्ती कराते हैं। इन्हीं कारणों से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का व्यवसाय बढ़ता चला जा रहा है। बेहतर तो यह है कि जरूरत के हिसाब से अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई कराई जाए, परंतु हिंदी को भुलाएं बिना।
-लोकेन्द्र मीणा, कोटा
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शोध पत्र अंग्रेजी में
विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के बारे में जितने भी शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं, वे अधिकतर विदेशों में प्रकाशित हुए हैं या भारत में भी प्रकाशित हुए हैं, तो अंग्रेजी में ही प्रकाशित हुए हैं। कड़वी सचाई यही है कि आज भी विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के मामले में पाठ्य सामग्री हिंदी में नगण्य है। इस कारण अंग्रेजी माध्यम के प्रति रुझान बढ़ रहा है।
-राजेश कुमार, शाहपुरा, भीलवाड़ा
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हर जगह अंग्रेजी का बोलबाला
बात-बात पर विदेशों से ज्ञान लेने जाने वाले हमारे अधिकारी, नेता और नीति निर्माताओं को उन देशों की उन्नति में उनकी भाषा का क्या योगदान है, क्या यह दिखाई नहीं देता? कॉरपोरेट जगत से लेकर स्कूल ,कॉलेजों, न्यायालय में अंग्रेजी को ही प्राथमिकता दी जाती है। रोजगार के दरवाजे उन्हीं के लिए खुले हैं जिन्हें धाराप्रवाह इंग्लिश आती है। ऐसे में हिंदी का क्या औचित्य रहा? वह तो अपने ही घर में पराई हो गई। हिंदी भाषा और हिंदी विद्यार्थियों की उपेक्षा, अपमान और अवहेलना दिखाई नहीं देती सरकार और समाज को? अपने ही घर में परायापन किसे अच्छा लगता है? उच्च शिक्षा, अनुसंधान और कॉर्पोरेट जगत में अंग्रेजी का बोलबाला है।
-एकता शर्मा ,जयपुर