पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
राष्ट्रपति शासन लगाया जाए
मणिपुर में स्थानीय पुलिस पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। सर्च ऑपरेशन चला कर पहले अवैध हथियारों को जब्त किया जाए। म्यांमार सीमा पर तारबंदी और सुरक्षा हो, ताकि घुसपैठ न हो। सेना को पूरी स्वतंत्रता दी जाए। साथ ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। -डॉ. राजीव कुमार, जयपुर
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अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई जरूरी
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा अब भी जारी है। यह बहुत चिंता का विषय है। विगत 4 माह में 175 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. भेदभाव के आरोपों का केंद्र सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। साथ ही शांति वार्ता समिति गठित करनी चाहिए। अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति पर उचित र्कावाई करनी चाहिए।
-चेतन सिंह, अजमेर
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असुरक्षा का भाव पनपा मणिपुर में कुकी और मैतेई दोनों ही समुदायों में बहुत ज्यादा असुरक्षा का भाव आ गया है। उनको लगता है कि हमको खुद को ही हमारी सुरक्षा करनी पड़ेगी। इस वजह से वे दो रास्ते अपना रहे हैं,एक हिंसा का और दूसरा पलायन का। हिंसा से निपटने के लिए ठोस नीति जरूरी है।
-निर्मला देवी वशिष्ठ, राजगढ, अलवर
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चीन की शह मणिपुर में हिंसा नहीं रुकने का कारण चीन है। भारत का कद दुनिया में बढऩा उसे रास नही आ रहा है। इसलिए वह म्यांमार के रास्ते से हिंसा को फैलाने में आग में घी डालने का काम कर रहा है। केंद्र सरकार को सख्त करवाई करते हुए सीमा सील कर देनी चाहिए। दोनों समुदायों को साथ बैठा कर समस्या का शांति से समाधान किया जा सकता है। -गोपाल अरोड़ा, जोधपुर
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नेतृत्व की नाकामी
मणिपुर में हिंसा का अब भी नहीं रुव पाना नेतृत्व की नाकामी है। चुनी हुई सरकार के रहते कानून-व्यवस्था बदहाल हो रही है, तो केन्द्र कों हस्तक्षेप करना चाहिए। मादक पदार्थों की तस्करी को रोकना चाहिए। मणिपुर सीमावर्ती राज्य है। लम्बे अंतराल तक वहां अराजकता देश के लिए ठीक नहीं है।
-हुकुम सिंह पंवार, इन्दौर, मध्य प्रदेश
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खुफिया एजेंसियों की विफलता
मणिपुर में हिंसा राजनीतिक तुष्टीकरण और खुफिया एजेंसियों की विफलता का परिणाम है। साथ ही राज्य सरकार के पक्षपाती रवैयो के कारण भी मणिपुर में हिंसा नहीं रुक पा रही हैं। केंद्र सरकार को मनमुटाव खत्म करने पर जोर देना चाहिए। -रघुवीर जैफ, मानसरोवर, जयपुर
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हिंसा पर राजनीति
आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाने ने हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है। हिंसा के कारणों का पता लगाने की बजाय सिर्फ राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है। -कविता गगरानी, कन्नौज