
छवि चमकाने के लिए मदद का स्वांग क्यों?
हमारे राजनेता भी न जाने किस मिट्टी के बने हैं। खुद कानून-कायदे बनाते हैं और फिर उनको तोडऩे में शान समझते हैं। कोरोना की चेन तोडऩे की बात करते हैं, लेकिन भीड़ जुटाकर उसी चेन का हिस्सा बन जाते हैं। महामारी तक में सियासी नफा-नुकसान आंकने वाले नेताओं को देखकर लगता है कि इन्हें सिर्फ अपनी छवि चमकाने की चिंता है, जनता के दु:ख-दर्द की नहीं। तभी तो दिल्ली हाईकोर्ट ने सियासी फायदे के लिए नेताओं द्वारा दवाओं की जमाखोरी पर तल्ख टिप्पणी की है। न केवल नेताओं पर, बल्कि दिल्ली पुलिस के रवैए पर भी, जो नेताओं के ऐसे कारनामों को 'जनसेवा' का नाम दे रही थी।
किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि कमोबेश सभी दलों के नेताओं को लेकर अदालत में गुहार की गई थी कि वे दवा, ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाइयों तक की जमाखोरी कर उसे सियासी फायदे के लिए बांटने में जुटे हैं। ऐसे दौर में जब कोरोना संक्रमितों को इन सबके लिए भटकने को मजबूर होना पड़ रहा हो, ऑक्सीजन और दवाओं तक के लिए मुंहमांगे दाम चुकाने को मजबूर होना पड़ रहा हो, नेताओं की यह दुष्प्रवृत्ति सीधे-सीधे जमाखोरी को बढ़ावा देने वाली है। राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ऐसी 'जनसेवा' दिल्ली में ही हो, ऐसा नहीं है। गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में भी कहीं ऑक्सीजन और कहीं दवाइयां नेताओं के माध्यम से वितरित की गई हैं। इंदौर में तो रेमडेसिविर इंजेक्शन भी भाजपा विधायकों के मार्फत देने के आरोप तक लगे हैं।
कोरोना लहर के पहले दौर में भी पलायन करने को मजबूर परिवारों को इन नेताओं ने भोजन पैकेट बांटे जरूर, पर उन पर भी अपना चेहरा व पार्टी का नाम चस्पा करने से नहीं चूके। कोर्ट ने सही कहा है कि कोरोना के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों को बांटने का काम नेताओं का नहीं है। वे भला करना चाहते हैं, तो संग्रहित की गई दवाइयों को सरकारी अस्पतालों को वितरण के लिए सौंप दें। ऑक्सीजन से लेकर रेमडेसिविर इंजेक्शन और दूसरी जरूरी दवाइयों का इस तरह का संग्रहण कोई अन्य करता दिखे, तो पुलिस उस पर शिकंजा कसते तनिक भी देर नहीं लगाती। लेकिन, जब ऐसे काम नेता करते हैं, तो वह अदालत को जवाब देती है कि ये तो दवा, ऑक्सीजन आदि के लिए लोगों की मदद ही कर रहे थे।
नेताओं से अपेक्षा की भी जानी चाहिए कि वे मुश्किल वक्त में जनता के साथ खड़े होंगे, लेकिन सिर्फ सियासत चमकाने के लिए नहीं। ऐसे काम उन जन प्रतिनिधियों की छवि भी खराब करते हैं, जो सही मायने में सरकारी मदद उसके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाने के जतन करते हैं।
Published on:
19 May 2021 08:15 am
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