
सरकार को चाहिए कि सब्सिडी का लाभ केवल आवश्यक वस्तुओं और मानव संसाधन विकास के लिए जरूरतमंद लोगों को ही प्रदान करे।
वर्तमान में सरकारी सब्सिडी से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलता है, परंतु यह सरकार के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गई है। इससे राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। सब्सिडी की आड़ में भ्रष्टाचार और अकुशलता को बढ़ावा मिल रहा है। योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। इसका दुष्प्रभाव समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ रहा है।
-संजय निघोजकर, धार
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को सभी प्रकार की सब्सिडी को पूर्णतः बंद कर देना चाहिए। सब्सिडी के कारण जनता निष्क्रिय और अकर्मण्य होती जा रही है। इससे देश का आर्थिक नुकसान हो रहा है और विकास अवरुद्ध हो रहा है। बेरोजगारी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। देश की तरक्की के लिए केवल वोट बैंक की राजनीति छोड़कर कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता है।
-कैलाश चन्द्र मोदी, चूरु
आज हर क्षेत्र में सरकारी सब्सिडी दी जा रही है जो आम जनता का अतिरिक्त बोझ कम करने में सहायक है। इससे सामाजिक कल्याण के साथ-साथ आर्थिक नीतियों को भी बल मिलता है। लोगों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है और कार्यक्षेत्र में समग्र विकास का ढांचा मजबूत होता है। हालांकि यह सीमित मात्रा में ही दी जानी चाहिए ताकि इसका दुरुपयोग न हो।
-महेश आचार्य, नागौर
सरकार द्वारा सब्सिडी या छूट का उपयोग चुनावी रेवड़ी के रूप में किया जा रहा है, जो देश के आर्थिक विकास में बाधक बन रहा है। सरकार को चाहिए कि सब्सिडी का लाभ केवल आवश्यक वस्तुओं और मानव संसाधन विकास के लिए जरूरतमंद लोगों को ही प्रदान करे। इससे उन्हें न केवल आर्थिक सहायता मिलेगी बल्कि वे रोजगार प्राप्त करने में भी सक्षम बनेंगे।
-हर्षित चौरसिया
सरकारी सब्सिडी और छूट का शत-प्रतिशत लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए। वर्तमान में बिचौलियों, भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों की कमीशनखोरी के कारण योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस पर कड़ा नियंत्रण स्थापित किया जाना आवश्यक है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सके।
-अजीतसिंह, बीकानेर
सरकारी सब्सिडी और छूट का व्यक्तिगत और सामाजिक क्षेत्र में विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित किया जाना आवश्यक है। जो लोग इसका दुरुपयोग करते हैं, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। योजनाओं की नियमित समीक्षा और मूल्यांकन भी आवश्यक है।
-राजेंद्र पचार, चूरु
एक निर्धारित सीमा तक दी जाने वाली सब्सिडी और छूट देश के लोगों के लिए वरदान साबित होती है। परंतु जब यह सीमा से अधिक हो जाती है तो अभिशाप बन जाती है। अत्यधिक सब्सिडी लोगों को आलसी और परनिर्भर बनाती है, जिससे उनकी उत्पादकता में कमी आती है। यह देश के विकास में बाधक बनने के साथ-साथ भ्रष्टाचार और अनियोजित व्यय को भी बढ़ावा देती है।
-गजेंद्र, डीग
सरकारी सब्सिडी और अधिक छूट का लाभ आम जनता को अवश्य मिलता है, लेकिन इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस बोझ की भरपाई विभिन्न प्रकार के करों से की जाती है, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसलिए सरकार को ऐसी संतुलित योजना बनानी चाहिए जिससे करदाताओं पर पड़ने वाला बोझ भी कम हो और जरूरतमंदों को लाभ भी मिले।
-दीपक फुलिया, हनुमानगढ़
सरकार को सब्सिडी और अधिक छूट देने की बजाय स्वास्थ्य सुविधाओं, शैक्षिक संस्थानों, जलापूर्ति, विद्युत आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यदि ये मूलभूत सुविधाएं मजबूत होंगी तो मानव विकास सूचकांक में सुधार होगा। इससे सब्सिडी और छूट की समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सकता है।
-हेमराज प्रजापत, नागौर
वर्तमान समय में सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनता को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। परंतु कई ऐसी योजनाएं भी हैं जिनके माध्यम से सरकार अपने राजनीतिक और निजी लाभों के लिए अनावश्यक छूट प्रदान कर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रही है। इस स्थिति को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार सरकार को चेतावनी दी है, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं आया है।
-विनायक गोयल, रतलाम
सरकारी सब्सिडी के माध्यम से लोग अपने लिए व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं और रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकते हैं। परंतु इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और दुरुपयोग भी हो रहा है। अधिक छूट का लाभ अक्सर अपात्र लोगों को मिल जाता है जबकि वास्तविक लाभार्थी इससे वंचित रह जाते हैं।
-गजानन पांडेय, हैदराबाद
Published on:
22 Dec 2024 01:45 pm
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