
Third eye meditation
हर मनुष्य में भी तीसरी आंख है। यह कोई परीकथा नहीं यह हकीकत है। चूरू के करीब एक दर्जन बच्चों ने इसको चरितार्थ कर दिखाया है। उक्त बच्चे तीसरी आंख से पढ़ाई करने के अलावा बिना देखे स्पर्श विद्या के माध्यम से रंग व वस्तुओं की पहचान भी कर लेते हैं। दो बच्चे तो तीसरी आंख के माध्यम से स्केटिंग भी करने लगे हैं।यह संभव हुआ है त्रिनेत्र जागरण से। मेडिटेशन के माध्यम से बच्चों की थर्ड आई (तीसर आंख) जागृत की गई है।
जानिए तीसरी आंख कब काम करती है
मनुष्य की तीसरी आंख तब काम करती है जब उसका मन शांत हो, चित्त स्थिर हो और वह समय ध्यान का होता है। आधुनिक मनोविज्ञान और वैज्ञानिक शोध कहती है कि दोनों भौंहों के मध्य एक ग्रंथि है जो शरीर का सबसे रहस्यमय अंग है। इस ग्रंथि को पाइनियल ग्रंथि कहते हैं। दोनों आंखों के बीच एक तीसरी आंख का अस्तित्व है। लेकिन साधारणत: वह निष्कृय रहती है। उसे खोलने के लिए कुछ करना पड़ता है। वह आंख अंधी नहीं है। वह बस बंद है।
इस तरह खोलते हैं तीसरी आंख
योगाचार्य डा. मनोज शर्मा ने बताया कि यह प्रयोग तृतीय नेत्र की रेखा पर ले आता है, जब दोनों आंखें नासाग्र पर केंद्रित होती हैं तो उससे कई बातें होती हैं। मूल बात यह है कि तुम्हारा तृतीय नेत्र नासाग्र की रेखा पर है। कुछ इंच ऊपर, लेकिन उसी रेखा में। एक बार तुम तृतीय नेत्र की रेखा में आ जाओ तो तृतीय नेत्र का आकर्षण उसका खिंचाव, उसका चुम्बकत्व इतना शक्तिशाली है कि तुम उसकी रेखा में पड़ जाओं तो उसकी ओर खींचे चले आओगे। बस ठीक उसकी रेखा में आ जाओ, ताकि तृतीय नेत्र का आकर्षण, गुरुत्वाकर्षण सक्रिय हो जाए। एक बार तुम ठीक उसकी रेखा में आ जाओ तो किसी प्रयास की जरूरत नहीं है। व्यक्ति को बस ठीक बिंदु जान लेना होता है।
16 साल के बाद तीसरी आंख खुलना मुश्किल
योगाचार्य शर्मा ने बताया कि 16 साल की उम्र पार करने के बाद तीसरी आंख नहीं खुल सकती। इसके बाद पाइनियल ग्रंथि पर मोटी लेयर आ जाती है जिससे वह नहीं खुल पाती। पांच से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों में तीसरी आंख जल्दी खुल जाती है।
यह है सीखने की स्टेज
स्पर्श
घ्रांण
सुनकर
देखना
मुहं से
Published on:
27 Jun 2017 11:45 am
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