
p v sindhu
नई दिल्ली । भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधु विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल मुकाम पर पहुंच गयी है । सिंधु के फाइनल मुकाबला जीतते ही वह भारत की एकलौती विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाली महिला हो जाएगी । भारतीय बैडमिंटन सनसनी पीवी सिंधु के पास ग्लास्गो में खेले जा रहे वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में जीतकर इतिहास बनाने का शानदार मौका है । सेमीफाइनल मुकाबले में सिंधु ने चीन की 19 वर्षीय खिलाड़ी चेन यू फेई को 21-13, 21-10 से हराया । इस जीत के साथ ही सिंधु ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ अपना अजेय अभियान जारी रखा है ।
काफी संघर्ष से भरा है सिंधु का सफर -
जानकारी के लिए आपको बता दें कि बैडमिंटन को लेकर सिंधू किस कदर समर्पित थी, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वे बचपन में रोज 56 किलोमीटर तक की दूरी अपने घर से कोचिंग कैंप आने तक के लिए तय करती थीं । अखबार की ये रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती है । जब अखबार में ये स्टोरी छपी तब सिंधू सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं और घर से दूरी होने के बावजूद समय पर कोचिंग कैंप पहुंचना उनकी आदतों में शुमार था । पुलेला गोपीचंद ने तरह तरह से कभी मैदान पर चील्लाने के लिए कहकर तो किसी और तरिके से परीक्षा लेकर सिंधु को परखा ,हर परीक्षा में पास होने वाली सिंधु को पुलेला ने सिंधु को ऐसा तराशा कि आज सिंधु भारत कि स्टार बैडमिंटन खिलाडी बन गयी हैं ।
सेमी फाइनल के मुकाबला में आसानी से जीती सिंधु -
आपको बता दें कि 48 मिनट तक चले मुकाबले में चीनी खिलाड़ी चेन यू फेई सिंधु के सामने कोई चुनौती नहीं पेश कर पाई । भारतीय खिलाड़ी ने दोनों ही सेट आसानी से जीते । 2013 और 2014 में खेले गए वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिंधु ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था । और अब फाइनल में उनका मुकाबला जापान की नोजोमी ओकुहारा से होगी । भारत की ओर से अबतक किसी भी शटलर ने गोल्ड मेडल पर कब्जा नहीं किया है । फाइनल रविवार शाम को खेला जाएगा ।
बचपन में इस खिलाडी से प्रभावित थी सिंधु -
सिंधु भारत के तमिल जाट परिवार से ताल्लुक रखती है । सिंधु के माता -पिता दोनों ही वॉली बॉल के खिलाडी थे जबकि सिंधु ने बैडमिंटन को अपना जीवन बनाया । इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा यह है कि उस समय की भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाडी पुलेला गोपीचंद से सिंधु काफी ज्यादा प्रभावित थी । एक बार स्थानीय मुख्यमंत्री के द्वारा जब पुलेला को सम्मानित किया जा रहा था तो यह देख के सिंधु अंदर से काफी रोमांचित हो उठी थी। जिसके बाद सिंधु ने बैडमिंटन को अपना जीवन बनाने के लिए ठान लिया । आज सिंधु को यहां तक पहुंचने में पुलेला का सराहनीय योगदान है। पुलेला के प्रतिभा ने सिंधु को ललकारा जिसके बाद सिंधु ने बैडमिंटन के कोर्ट के तरफ पैर बढ़ाया और मुड़कर फिर कभी पीछे नहीं देखा ।
Published on:
27 Aug 2017 06:11 pm

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