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Paralympics: योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो इवैंट में जीता सिल्वर मेडल, 9 वर्ष की उम्र में हुई थी यह गंभीर बीमारी

योगेश कथुनिया ने पेरिस पैरालंपिक में पुरुषों के एफ56 चक्का फेंक स्पर्धा में 42.22 मीटर के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक जीता।

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Yogesh Kathuniya Wins Silver Medal, Paralympics 2024: भारत के पैरा एथलीट योगेश कथुनिया ने सोमवार को डिस्कस थ्रो इवैंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता है। योगेश ने एफ 56 वर्ग में 42.22 स्कोर के साथ यह मेडल अपने नाम किया। यह भारत का पैरालंपिक में 8वां मेडल है। अबतक भारत एक गोल्ड, तीन सिल्वर और चार ब्रॉन्ज के साथ मेडल टैली में तीसरे नंबर पर है।

इस इवैंट में ब्राजील के बतिस्ता डॉस सैंटोस ने 46.86 का स्कोर हासिल कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं ग्रीस के कोंस्टांटिनोस ने 41.32 मीटर के थ्रो के साथ तीसरे नंबर पर रहे। उल्लेखनीय है कि योगेश ने 2020 के पैरालिंपिक में पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ 56 स्पर्धा में भी सिल्वर मेडल जीता था।

योगेश आर्मी परिवार से आते हैं। उन्हें 9 साल की उम्र में गुलियन-बैरे सिंड्रोम हो गया था। जिसके चलते उनके पैरों ने काम करना बंद कर दिया। इसके बावजूद योगेश ने हार नहीं मानी। उनकी मां ने फिजियोथेरेपी सीखी और 3 साल के अंदर ही 12 साल की उम्र में योगेश ने फिर से चलने की ताकत हासिल कर ली।

योगेश ने चंडीगढ़ के इंडियन आर्मी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की। बाद में उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई की। पैरालिंपिक 2020 में उपलब्धि के लिए उन्हें नवंबर 2021 में भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।