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पाकिस्तान में लगातार अगवा हो रहे हैं सोशल वर्कर, आखिर क्या है वजह?

पाकिस्तान सुरक्षा एजेंसियां कई पाकिस्तानियों को अकारण उठा कर ले जा रही हैं।

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Pradeep Kumar Pandey

Dec 14, 2017

pakistan

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक अजीबों-गरीब घटना सामने आ रही है। खबरों की माने तो वहां की सुरक्षा एजेंसियां कई पाकिस्तानियों को अकारण उठा कर ले जा रही हैं। यह जानकारी पाकिस्तान के ही एक अखबार में छपी है।

अखबार की खबर में हुआ ये खुलासा
बुधवार को पाकिस्तान के एक अखबार में प्रकाशित एक लेख में इस बात की जानकारी दी गयी थी। उक्त खबर के अनुसार, 'युवा समाजिक कार्यकर्ता राजा खान इस लंबी सूची में शामिल होने वाला नया नाम है.' खान कई सप्ताह से लाहौर के अपने घर से गायब हैं। उनके परिवार और दोस्तों का मानना है कि उन्हें सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में लिया गया है। अखबार ने अपने लेख में इसकी आलोचना भी की और लिखा कि 'उनका अपराध यह है कि उनके पास एक सोचने वाला दिमाग है और क्षेत्रीय शांति और सह-अस्तित्व का आदर्श है, जो हमारी वैचारिक सीमाओं के स्वयंभू संरक्षकों को अस्वीकार्य है।'

गायब शख्स भारत-पाक की शांति के लिए कर रहा था पहल
जानकारी के मुताबिक खान की उम्र 30 वर्ष से ऊपर है, और उन्होंने कथित तौर पर भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के कार्यो को आगे बढ़ाने में हिस्सा लिया था और इस पहल के लिए आगाज-ए-दोस्ती नामक एक समूह का गठन किया। वह पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे समूह के साथ भी काफी सक्रिय थे।

अकारण ही अगवा किये जा रहें है लोग
अखबार ने कहा, 'शहरों से ज्यादा से ज्यादा लोगों को उठा कर ले जाया जा रहा है, जिसका कारण कभी बताया नहीं गया। उनमें से कुछ यातनाएं झेलने के बाद वापस आ गए, लेकिन अन्य बहुत सारे लोग इतने भाग्यशाली नहीं रहे। कोई नहीं जानता कि उन्होंने किस अपराध को अंजाम दिया या उनपर कौन से आरोप लगे हैं।'

गायब होने वाले सातवें समाजिक कार्यकर्ता हैं राजा खान
अखबार के अनुसार, खान इस वर्ष घर से गायब होने वाले सातवें समाजिक कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि जनवरी में इस्लामाबाद और पंजाब के अन्य शहरों से छह ब्लॉगर्स और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को ले जाया गया। खबर के अनुसार, 'दक्षिणपंथी समूहों के विरोध प्रदर्शनों और अंतर्राष्ट्रीय समुदायों द्वारा दवाब बनाए जाने के बाद गायब हुए पांच लोग दो महीनों के भीतर घर वापस आ गए।हिरासत में कथित तौर पर उनपर अत्याचार किया गया।'

वापस आने वाला भी डर के मारे अपना मुंह नहीं खोलता
आपको बता दें कि आलेख के अनुसार, 'पिछले वर्ष पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने कराची से अब्दुल वाहिद बलूच का अपहरण किया। वह एक टेलीफोन ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे।' आगे कहा गया, 'वह चार महीने बाद घर लौट आया और वह इतना डरा हुआ था कि दूसरों की तरह अपने ऊपर हुए अत्याचार के बारे में बात भी नहीं कर सका। इससे स्पष्ट है कि उसके साथ हुए गैरकानूनी कार्य के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।'

लापता भारतीय की जांच कर रही महिला पत्रकार भी हुई थी अगवा
यही नहीं लापता भारतीय व्यक्ति हामिद अंसारी के मामले की जांच कर रही एक पत्रकार जीनत शहजादी का अगस्त 2015 में लाहौर में शस्त्र लोगों ने अपहरण कर लिया। रिपोर्ट के अनुसार, 'हाल में शहजादी के वापस लौटने की खबर आई थी, लेकिन उसके बाद से पत्रकार के बारे में कुछ भी नहीं सुना गया। पत्रकार के लापता होने से उनके छोटे भाई इतना आहत हुए कि उन्होंने आत्महत्या कर ली।' अखबार ने कहा कि सबसे डरावनी बात यह है कि नागरिक शासन के तहत इस वर्ष लापता लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।