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चीफ जस्टिस के खिलाफ एक्शन लेने पर, जब उबल उठा था पाकिस्तान

भारत से पहले पाकिस्तान में भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज ने आवाज उठाई थी।

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नई दिल्ली। भारतीय न्यायपालिका में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के पदस्थ जजों ने मीडिया से बात की। 4 वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पूरी न्यायपालिका और सरकार में हड़कंप मचा दिया है। भारत से पहले पाकिस्तान में भी एक जज लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठा चुके हैं।


मुशर्रफ ने मांगा इस्तीफा
बात वर्ष 2007 की है। पाक सुप्रीम कोर्ट के 20वें मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी ने पाकिस्तान में भ्रष्टाचार और कमजोर प्रशासन को लेकर कई बार सरकार को फटकार लगा चुके थे। उसी दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनने के बाद 9 मार्च 2007 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने पाक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश इफ्तिखार चौधरी से इस्तीफे की मांग की थी। चौधरी ने न सिर्फ राष्ट्रपति की मांग पर इस्तीफा देने से इनकार कर दिया बल्कि इसके खिलाफ आवाज भी उठा दी।

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सड़क पर उतर गई आवाम
पाकिस्तान की आवाम इफ्तिखार चौधरी के ईमानदारी की मुरीद थी। लोगों में इस बात का गुस्सा था कि सरकार चौधरी पर गलत व्यवहार और पद के दुरुपयोग का आरोप लगा कर इस्तीफा मांग रही है। सरकार के खिलाफ लोगों ने आंदोलन छेड़ दिया। उस वक्त पाकिस्तानी मीडिया ने इसे लोकतंत्र बचाने की मुहिम नाम दिया था।

सरकार ने वापस लिया फैसला
चौधरी ने जब इस्तीफा देने से मना किया तो परवेज मुशर्रफ ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। देश के मुख्य न्यायधीश निलंबन से लाहौर बार एसोसिएशन और वकील भी उनके समर्थन में आ गए। पाकिस्तान के कई हिस्सों में पुलिस और वकीलों के बीच झड़प हुई। वकीलों ने इस निलंबन को कानून का उल्लंघन बताया। पूरे पाकिस्तान में अदालतों का बहिष्कार हो गया। जिसके बाद सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ गया।


भारत में क्या हुआ?
बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जज प्रेस कॉंफ्रेंस की। जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे को लेकर मुख्य न्यायधीश से बात करनी चाही, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हुए।