
बांगड़ अस्पताल के टीबी वार्ड में भर्ती मरीज।
बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय बनने के बाद चिकित्सक नए आए, सुविधाओं का विस्तार हुआ, मरीजों की संख्या बढ़ी और अब जगह कम पड़ रही है। ऐसे में बीमारी का उपचार करने के साथ संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। हालात यह है कि टीबी के 18 बेड के वार्ड में ही 22 से अधिक बेड लगा दिए है। उस वार्ड में टीबी मरीजों के साथ गंभीर टीबी के एमडीआर मरीज भी रहते है। वहीं अस्थमा व श्वास रोग के अन्य मरीज भी भर्ती है। वहीं मरीजों के परिजन भी बैठे रहते हैं। ऐसे में वार्ड में संक्रमण फैलने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। ऐसा ही हाल मेडिकल सी वार्ड का है। वहां भी मरीज अधिक होने से गैलेरी में बेड लगाकर मरीजों को सुलाना पड़ रहा है।
एमडीआर वार्ड होना चाहिए अलग
टीबी के एमडीआर मरीजों के लिए वार्ड अलग होना चाहिए। ये गंभीर टीबी से ग्रसित होते है। इनके साथ अन्य मरीज होने पर संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है। अस्पताल में पहले इनके लिए एक अलग वार्ड बनाया था, लेकिन अब टीबी वार्ड में ही एक हिस्सा अलग किया है।
बर्न वार्ड ही नहीं
अस्पताल में बर्न वार्ड पहले पीएमओ कक्ष के पास ही था। वहां अब ऑपरेशन थियेटर बना दिया है। ऐसे में बर्न के मरीजों के लिए कोई वार्ड नहीं है। उनके मरीजों को अभी सर्जरी के मरीजों के साथ वार्ड में रखा जा रहा है। हालांकि इस बर्न वार्ड जनवरी से नई जगह पर शुरू करने का दावा किया जा रहा है।
आठ बेड का बना रहे वार्ड
बर्न के मरीजों के लिए पुराने ऑथोZपेडिक वार्ड को तैयार करवाया जा रहा है। उसमे केवल रंग कार्य शेष है। यह वार्ड जनवरी में शुरू होगा। टीबी के मरीजों को अभी एक ही वार्ड में रख रहे है। मोर्चरी के पास वार्ड तैयार होने पर वहां अलग व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे।
डॉ. दीपक वर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज, पाली
Published on:
22 Dec 2023 10:32 am
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