- जिम्मेदारी के नाम पर खानापूर्ति कर रही नगर परिषद - चपेट में आने से कई घायल हुए तो कइयों को गंवानी पड़ी जान
पाली. शहर की कई सडक़ों पर मवेशियों के जमघट से आमजन त्रस्त है। इनकी चपेट में आकर कई जने अस्पताल पहुंच चुके है तो कइयों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी। लेकिन, सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदारों ने अनदेखी की चादर ओढ़ रखी है। इसका नुकसान शहर की जनता को उठाना पड़ रहा है। कानून कहता है कि सडक़ों को मवेशियों से मुक्त रखने की जिम्मेदारी नगर निकायों की है। इसकी अवहेलना पर संबंधित कार्मिक को जेल तक हो सकती है। लेकिन, नियमों की जानकारी के अभाव में शहरवासी वेदना सहते आ रहे हैं। सडक़ों और चौराहों पर मवेशियों के जमघट से न सिर्फ आवागमन बाधित रहता है अपितु हादसे होने का डर भी बना रहता है।
एक तरफ देश भर में गौ-तस्करी व गौ हत्याओं के मामले गर्माए हुए है। दूसरी ओर राज्य भर में सडक़ों पर विचरण कर रहे मवेशी वाहन चालकों के लिए आफत का कारण बने हुए है। यह समस्या पिछले कई सालों से है लेकिन समाधान को लेकर स्थानीय निकाय को ठोस कदम नहीं उठा सके। इसके चलते आज भी सडक़ों परे बेसहारा मवेशी विचरण करते नजर आ जाते है।
सजा का है प्रावधान
शहर की सडक़ों पर विचरण कर रहे मवेशियों से आमजन को निजात दिलाने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है। मवेशी को लेकर कोई भी व्यक्ति पहले परिषद में शिकायत करे। कार्रवाई नहीं होने पर सभी साक्ष्यों के साथ न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके लिए कानून में विशेष धाराओं के तहत स्वायत्त विभाग के खिलाफ जुर्माना व जेल भेजने तक के प्रावधान हैं। यही नहीं, सडक़ों पर मवेशियों को बांधना, इनके लिए घास रखने के अलावा सडक़
किनारे घास बेच कर वहीं खड़े मवेशियों को खिलाने पर भी कार्रवाई के प्रावधान हैं।
शहर के इन क्षेत्रों में लोग भोग रहे पीड़ा
शहर के बांगड़ कॉलेज मार्ग, बापू नगर के निकट, इन्दिरा कॉलोनी, नया बस स्टैंड, मस्तान बाबा, हाउसिंग बोर्ड, मोती चौक इसके साथ ही हाइवे पर भी मवेशियों का जमावड़ा रहता है। कई बार तो सडक़ों पर मवेशी लड़ते नजर आ जाते है।
हाईकोर्ट भी कर चुका है तल्ख टिप्पणी
इसको लेकर अब तो हाईकोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी कर दी है कि राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में सडक़ों पर विचरण करने वाले मवेशियों से आमजन को कब राहत
मिलेगी। हाईकोर्ट ने तो तीन सप्ताह में सिस्टम
विकसित करने के निर्देश तक दे दिए है। साथ ही अदालती आदेशों की पालना में ढिलाई बरतने पर नाराजगी भी जताई। मौखिक टिप्पणी की है कि पालना नहीं हुई तो अफसरों को जेल भेजने के अलावा
कोई चारा नहीं है। पालना के लिए अंतिम मौका देते हुए सुनवाई 31 अगस्त तक टाल दी है। न्यायाधीश मनीष भंडारी ने यह टिप्पणी सडक़ पर विचरण कर रहे मवेशी की चपेट में आने से विदेशी नागरिक की मौत पर स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर 10 अगस्त को की।
कांजी हाउस और
बना रहे हैं
&मंडिया रोड पर एक कांजी हाउस और बना रहे है। जहां बेसहारा मवेशियों को एक सप्ताह तक रखेंगे। उसके बाद उन्हें गोशालाओं मे भेज देंगे। इसके साथ जुर्माना राशि भी बढ़ाएंगे। इससे पशुपालक अपने मवेशियों को सडक़ों पर नहीं छोड़ेंगे।
- महेन्द्र बोहरा, सभापति नगर परिषद, पाली