-पाली व सुमेरपुर में कई कौओं की मौत-विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रहे पशुपालन विभाग के कार्मिक
पाली। वर्ष 2020 लगते ही कोरोना कहर बनकर टूटा था। वर्ष 2021 में आस थी कि कोरोना की वैक्सीन आने से राहत मिलेगी, लेकिन नए साल के लगते ही प्रदेश के झालावाड़ में पक्षियों की मौत ने प्रशासन व सरकार को अलर्ट मोड पर ला दिया। इसके बाद अब पाली जिले के सुमेरपुर व पाली शहर में लगातार दो दिन से मर रहे पक्षियों से बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ गया है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मृत पक्षियों के विसरा की जांच रिपोर्ट आने पर ही पता लग सकेगा कि उनकी मौत बर्ड फ्लू से हुई है या किसी अन्य कारण से, लेकिन अभी तक जो लक्षण सामने आए है। वे सभी बर्ड फ्लू की ओर से ही इशार कर रहे है।
इससे बचाव ही उत्तम उपचार
मेडिकल कॉलेज में मेडिसन विभाग के सह आचार्य डॉ. वीरेन्द्र चौधरी के अनुसार बर्ड फ्लू का अभी तक कोई विशेष उपचार नहीं है। हालांकि इसमें टेमी फ्लू आदि दवा दी जाती है। यह रोग हवा से ज्यादा फैलता है। इसमें कोरोना की तरह ही बदन दर्द, हल्का बुखार, नाक में पानी आना आंखे लाल होना, आंखों में दर्द होना, आंसू आना आदि लक्षण नजर आते है। इस रोग से बचने के लिए भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहना चाहिए। मांसाहार से बचना चाहिए। उनका कहना है कि इस रोग में मृत्यु दर 50 से 60 प्रतिशत तक रहती है।
धूप करने से खतरा रहता कम
आयुर्वेद विभाग के डॉ. जयराज सिंह शेखावत ने बताया कि धूप करने से इस वायरस के प्रभाव को कम किया जा सकता है। घरों में या पक्षियों की मौत के स्थल पर गुगल, लोबाण, नीम के पत्ते, पीली सरसों, कपूर तथा अगर-तगर चंदन आदि का धूप करना चाहिए। इस रोग का चर्म व एलर्जी रोग के साथ पक्षी पालन का कार्य करने वालों को अधिक रहता है। आयुर्वेद के अनुसार बर्ड फ्लू रोग इस रोग से संक्रमित व्यक्ति या पक्षी के सम्पर्क में आने, हाथ मिलाने तथा साथ भोजन करने से हो सकता है।
पीपीइ किट की परेशानी
मृत कौओ का विसरा लेने और उनको जलाने की प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए पशुपालन व वन विभाग के अधिकारियों के पास पीपीइ किट होना जरूरी है। जबकि पाली में हालात यह है कि दोनों विभाग सोमवार सुबह तक चिकित्सा विभाग और अन्य विभाग के अधिकारियों को फोन कर पीपीइ किट की व्यवस्था कराने का आग्रह कर रहे थे। सुमेरपुर में भी पशुपालन विभाग के कार्मिकों के पास किट नहीं है।
पुख्ता रूप से नहीं कह सकते
अचानक पक्षी मरे हुए मिले है। ऐसा बर्ड फ्लू के कारण हो सकता है, लेकिन अभी तक पुख्ता रूप से नहीं कहा जा सकता है। हमने रविवार को 17 सेम्पल पाली व उससे पहले जोधपुर के 7 सेम्पल जांच के लिए भोपाल भेजे है। इस रोग से पक्षियों की मृत्यु दर 70 प्रतिशत से अधिक रहती है। संक्रमित पक्षियों को लाना पड़ता है। यह रोग पक्षियों से इंसानों में फैल सकता है। -डॉ. सीडी गौतम, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, पाली