
अखरता है गांव का नाम, ग्रामीण चाहते हैं हो जाए सत्यपुर
Patrika campaign : पाली/रायपुर मारवाड़। पाली जिले का एक गांव ऐसा भी है, जो नाम से ही चर्चित है। भले ही इस गांव से प्रत्येक जिलेवासी रूबरू न हुए हो लेकिन अजीब नाम से जरूर वाकिफ हैं। गांव के लोग नाम बदलने की चाहत जरूर रखते है लेकिन जटिल प्रक्रिया के बारे में सोच मन मसोस कर रह जाते है। हम बात कर रहे हैं रायपुर उपखंड क्षेत्र के झूठा गांव की। जो उपखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर है। ब्यावर पिंडवाड़ा फोरलेन से सटे इस गांव के लोग अपने गांव को झूठा के स्थान पर सत्यपुर नाम से पहचान मिलने की उम्मीद लगाए है।
रिकॉर्ड में चढ़ गया झूठा
जानकार बताते है कि 1957 में जब पंचायत राज का गठन हुआ और इस गांव को भी ग्राम पंचायत मुख्यालय का दर्जा मिला तब रिकॉर्ड में गांव का नाम जूट की बजाय झूठा दर्ज हो गया। तब से झूठा नाम से गांव की पहचान बन गई।
यूं पड़ा झूठा नाम
झूठा नाम के अर्थ से सभी लोग वाकिफ है लेकिन इस गांव का नाम झूठा क्यों है ,इसकी अलग कहानी है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सबसे पहले तीन जाति विशेष के लोग ही रहा करते थे। वो भी अपनी अलग अलग ढाणी बसाकर रहते थे। एक बार जब कुछ लोगों ने गांव पर आक्रमण किया तब तीनों जाति के लोगों ने एकजुट होकर मुकाबला कर जीत हासिल की थी। तब से वे सभी एकजुट रहने लगे। गांव का नाम जूट रख दिया।
यूपी में बदला तो फिर हमारा क्यों नहीं
झूठा गांव के लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में कई बड़े शहरों, कस्बों, गांवों के नाम बदल दिए। जब नाम बदलने का कानून प्रावधान है तो फिर झूठा गांव का नाम क्यों नहीं बदला जा सकता है? ग्रामीणों में एक स्वर में मुख्यमंत्री से गुहार लगा गांव का नाम झूठा से बदल सत्यपुर रखने का प्रस्ताव दिया है।
1969 में किया प्रयास :
वर्ष 1969 में ग्राम पंचायत कार्यालय की चार दीवारी करवा शिलालेख लगवाया था। तब सरपंच और वार्डपंच ने झूठा ऑब्लिक सत्यपुर नाम लिखवाया था। तब गांव का नाम बदलने के कागजी प्रयास भी हुए थे लेकिन परिणाम मिल नहीं पाया था।
Published on:
26 Aug 2022 03:59 pm
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